तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार गिरफ्तार, 2014 की भर्ती प्रक्रिया की जांच तेज
सपा सरकार के कार्यकाल में हुई भर्ती पर उठे थे सवाल, अभियोजन स्वीकृति की लंबित फाइल पर भी निगाहें
लखनऊ उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश
उत्तर प्रदेश में पशुपालन विभाग के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने बड़ी कार्रवाई की है। वर्ष 2014 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार को लखनऊ के गोमती नगर से गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर मामला फिर चर्चा में आ गया है।

यह मामला प्रदेश में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया में जवाबदेही से जुड़ा है। भर्ती में कथित गड़बड़ियों की जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों की भूमिका, प्रक्रिया के पालन और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, गिरफ्तारी अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले में आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
वर्ष 2014 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और राजकिशोर सिंह पशुधन विकास मंत्री थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उस समय विभाग में भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों की जांच आगे बढ़ रही है। राजकिशोर सिंह वर्तमान में भाजपा में हैं। इस मामले में उनकी भूमिका या जिम्मेदारी के संबंध में कोई निष्कर्ष निकालने से पहले जांच और आधिकारिक अभिलेखों की पुष्टि आवश्यक है।

मामले से जुड़ी अभियोजन स्वीकृति की फाइल लंबित होने की जानकारी भी सामने आई है। सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति की प्रक्रिया जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, लंबित फाइल किस अधिकारी से संबंधित है और उस पर वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
भर्ती घोटाले की जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि चयन प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, यदि अनियमितताएं हुईं तो उनकी प्रकृति क्या थी और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार थे। ईओडब्ल्यू की कार्रवाई से मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर निगाहें टिक गई हैं।




