सासाराम/रोहतास/ Etv News 24/ब्यूरो रिपोर्ट
सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। रोहतास जिले के सासाराम-चौसा मुख्य पथ पर खड़गपुरा मोड़ के समीप लगभग 4 लाख 50 हजार 200 रुपये की लागत से निर्मित यात्री शेड अब यात्रियों की सुविधा के बजाय भ्रष्टाचार की कहानी बयां करता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों ने जिला परिषद करगहर दक्षिणी और संबंधित अधिकारियों पर मिलीभगत कर सरकारी राशि की बंदरबांट करने का आरोप लगाया है।
पहला सवाल – जब पहुंचने का रास्ता ही नहीं तो यात्री शेड किसके लिए?ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर यात्री शेड का निर्माण कराया गया है, वहां तक पहुंचने के लिए न तो कोई समुचित रास्ता बनाया गया और न ही मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए पुलिया का निर्माण कराया गया। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, क्योंकि पानी भर जाने से यात्री शेड तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यात्री शेड तक जाने की व्यवस्था ही नहीं की गई, तो आखिर लाखों रुपये खर्च कर इस निर्माण का उद्देश्य क्या था? लोगों का आरोप है कि केवल सरकारी धन निकालने के लिए यह निर्माण कराया गया।
छह महीने में ही खुल गई निर्माण की पोल
ग्रामीणों के अनुसार, यात्री शेड का निर्माण हुए अभी छह महीने भी पूरे नहीं हुए हैं और इसकी गुणवत्ता की पोल खुलने लगी है। शेड की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं, टाइल्स कई जगहों से उखड़ गई हैं और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी जल्दी भवन जर्जर नहीं होता। इससे साफ प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती गई है।
अधिकारी और जनप्रतिनिधि की मिलीभगत का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि योजना की पूरी राशि निकाल ली गई, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि बिना गुणवत्ता जांच और बिना स्थल निरीक्षण के भुगतान कर दिया गया, जिससे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला परिषद करगहर दक्षिणी के कई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं और अब यह यात्री शेड भी चर्चा का विषय बन गया है।
पंचायत से जिले तक चर्चा का विषय बना मामला
खड़गपुरा मोड़ का यह यात्री शेड अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने और दोषी अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा इसी तरह बर्बाद होता रहेगा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें-
निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए।
भुगतान और प्राक्कलन की जांच की जाए।
दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई हो।
मुख्य सड़क से यात्री शेड तक पहुंचने के लिए पुलिया और रास्ते का निर्माण कराया जाए।
निर्माण में हुई कथित अनियमितताओं की जांच कर सरकारी धन की वसूली की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 4.50 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी जब यात्री शेड तक पहुंचने का रास्ता नहीं है, तो यह सुविधा जनता के लिए बनी है या फिर भ्रष्टाचार ..…………….?




