सासाराम/रोहतास/Etv News 24
गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, जमुहार, सासाराम के अंतर्गत संचालित नारायण कृषि विज्ञान संस्थान के शस्य विज्ञान विभाग में कार्यरत सहायक प्राध्यापक सह-प्रभारी फसल प्रक्षेत्र डॉ. धनंजय तिवारी ने बताया, रोहिणी नक्षत्र धान की नर्सरी (बिचड़ा) डालने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र को खरीफ खेती विशेषकर लम्बी अवधी के धान की प्रजाति की बुआई एवं नर्सरी तैयार करने के लिए अनुकूल माना जाता है। इस समय मौसम में गर्मी एवं नमी बढ़ने लगती है, जो धान के बीज अंकुरण और पौध वृद्धि के लिए उपयुक्त रहती है। किसानों के लिए यह समय धान की उन्नत खेती की नींव रखने जैसा है। किसान भाई इस समय धान की नर्सरी तैयार कर अच्छी एवं स्वस्थ पौध प्राप्त कर सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार भी रोहिणी नक्षत्र को कृषि एवं हरियाली का प्रतीक माना गया है। इस समय वातावरण में नमी बढ़ने लगती है तथा प्री-मानसून वर्षा की शुरुआत होने से खेतों में पर्याप्त आर्दता उपलब्ध रहती है। यही कारण है कि इस अवधि में बोए गए धान के बीज तेजी से एवं समान रूप से अंकुरित होते हैं। इसके साथ ही वातावरण में नमी अधिक रहने से बीजों में अंकुरण क्षमता बढ़ती है और पौध मजबूत बनती है। इस समय तैयार की गई नर्सरी में पौधों की जड़ें अच्छी विकसित होती हैं तथा बाद में मुख्य खेत में रोपाई करने पर पौधे जल्दी स्थापित हो जाते हैं। रोहिणी नक्षत्र में नर्सरी तैयार करने का एक बड़ा लाभ यह भी है कि समय पर पौध तैयार होने से किसानों को मानसून की पहली अच्छी वर्षा के साथ रोपाई करने का अवसर मिल जाता है और पौधे को विकसित होने का भी पर्याप्त समय मिलता है। इससे फसल की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन में वृद्धि की संभावना रहती है। किसानों को सलाह दी जाती है कि नर्सरी के लिए ऊँची एवं समतल भूमि का चयन करना चाहिए, जहाँ जल निकास की उचित व्यवस्था हो। खेत की अच्छी तरह जुताई करने के बाद सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाना चाहिए साथ ही नर्सरी में उन्नत एवं प्रमाणित धान के बीजों का ही उपयोग करना चाहिए। अगर बीज की मात्रा की बात करे तो 2.5 से 3 किलोग्राम बीज एक बीघा में रोपने के लिए पर्याप्त होता है । हालाँकि बीज में जमाव प्रतिशत कम है, तो किसान भाई 4 से 4.5 किलो बीज प्रति बीघा की दर से बिचड़ा के लिए प्रयोग कर सकते है। किसान भाइयो को बीज बोने से पहले 1 लीटर पानी में 10-20 ग्राम नमक के पानी में भिगो देना चाहिए, जिससे हल्के और खराब बीज अलग हो जाये इसके बाद बीज को पानी से छानकर जूट के बोरियो से 15 से 20 घंटे के लिए ढक देना चाहिए और बीज अंकुरित होने के बाद ही बुवाई करना चाहिए। बीज बुवाई के समय खेत की सतह पर पानी होना आवश्यक है और उसके बाद भी तापमान अधिक होने के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बनाये रखे। किसान भाइयो को अपने-अपने क्षेत्र के हिसाब से उन्नत प्रजातियों का चयन करना चाहिए जिससे अधिक लाभ प्राप्त हो। सुगंधित धान के प्रभेद में : राजेन्द्र भगवती, राजेन्द्र कस्तूरी, राजेंद्र सुवासिनी, निचली भूमियो के लिए: सबौर हीरा, स्वर्ण सब 1, राजेंद्र महसूरी तथा सूखा वाले क्षेत्रों के लिए : सबौर हर्षित धान, राजेंद्र श्वेता, सबौर सम्पन्न धान, सबौर श्री बहुत ही उत्तम किस्म की प्रजाति है | अधिक उत्पादन के लिए स्वर्णा (एमटीयू 7029), बी पी टी 5204 किसान भाइयो को प्रयोग करना चाहिए।



