बिहार/न्यूज डेस्क/Etv News 24
बिहार की सियासत और प्रशासनिक गलियारों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जिसने आम जनता और खास तौर पर टैक्सपेयर के बीच नई बहस छेड़ दी है। बताया जाता है कि एक तरफ जहां राज्य का आम मतदाता, किसान और मजदूर आज भी टोटो, टेंपो और ट्रैक्टर की धूल भरी सवारी करने को मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ ‘नई व्यवस्था’ के नाम पर सूबे के मंत्रियों और रसूखदार अधिकारियों के लिए लग्जरी गाड़ियों का बेड़ा तैयार किया जा रहा है।
महंगी गाड़ियों में ‘शान’ की सवारी
मिली जानकारी के अनुसार, आपको बताया जाता है कि अब साहबों के सफर को आरामदायक बनाने के लिए इनोवा क्रिस्टा (Innova Crysta), XUV 700 और टाटा सफारी (Tata Safari) जैसी महंगी और हाई-टेक गाड़ियों का इंतजाम किया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या विकास की रफ्तार नापने के लिए इन लग्जरी गाड़ियों का होना अनिवार्य है?
पसीना जनता का, ऐश ‘माई-बाप’ की?
वही इस नई व्यवस्था पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आम जनता कड़ी धूप और पसीने में मेहनत कर टैक्स भरती है ताकि देश और राज्य का विकास हो सके। लेकिन विडंबना देखिए कि उसी टैक्स के पैसे से सत्ता के गलियारों में बैठे ‘भाग्य विधाता’ ऐशो-आराम की सवारी कर रहे हैं।
*"हमारा टैक्स, उनकी लग्जरी! मालिक (जनता) टोटो पर और सेवक (अधिकारी-मंत्री) सफारी पर*
क्या यही सुशासन की परिभाषा है?” — यह सवाल आज बिहार के हर जागरूक नागरिक के मन में है।
‘जागो बिहार, जागो भारत’
सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक इस मुद्दे को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है। लोग इसे ‘लोकतंत्र के मालिकों’ (मतदाताओं) का अपमान बता रहे हैं। भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग अब ‘जागो बिहार, जागो भारत’ का नारा बुलंद कर रहे हैं, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रुक सके और प्राथमिकता लग्जरी गाड़ियों के बजाय बुनियादी सुविधाओं को दी जाए।
मुख्य बिंदु:
- नई गाड़ियाँ: इनोवा, XUV 700 और टाटा सफारी का होगा बेड़ा।
- खर्च: आम जनता के टैक्स से जुटाई जाएगी भारी-भरकम राशि।
- तुलना: जहां जनता ट्रैक्टर-टेंपो पर निर्भर है, वहीं साहबों को चाहिए ‘मखमल’ जैसा सफर।
अब देखना यह है कि क्या सरकार इस बढ़ते विरोध को देखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करती है या फिर जनता के पसीने की कमाई इसी तरह ‘शाही सवारी’ की भेंट चढ़ती रहेगी।



