समस्तीपुर/बिहार न्यूज डेस्क/Etv News 24
समस्तीपुर जिले के वैनी थाना अंतर्गत पूसा रोड स्थित एक एल्युमीनियम फैक्ट्री में बॉयलर फटने के हादसे की शुक्रवार को भाकपा-माले की जांच टीम ने घटनास्थल पर पहुँचकर जांच की एवं आस-पास के लोगों से हादसे की विस्तृत जानकारी ली। जांच टीम में भाकपा-माले राज्य कमिटी सदस्य सह खेग्रामस राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी, खेग्रामस राज्य उपाध्यक्ष जीवछ पासवान, भाकपा-माले जिला स्थायी समिति सदस्य सह माले प्रखंड सचिव अमित कुमार, खेग्रामस जिलाध्यक्ष उपेन्द्र राय शामिल थे। माले नेताओं ने मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है।जांच टीम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी एवं 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग सरकार से की है।भाकपा-माले राज्य कमिटी सदस्य सह खेग्रामस राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी ने कहा है कि वैनी के पूसा रोड स्थित एक एल्युमीनियम फैक्ट्री में बॉयलर फटने से चार मजदूरों की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से जख्मी हालत में ईलाजरत हैं। घटना के बाद से फैक्ट्री का मालिक एवं मैनेजर फरार है।हादसे में एक मजदूर का सिर उड़ गया, किसी का हाथ तो किसी का पैर उड़ गया।मजदूरों को मलबे से बाहर निकालने के लिये जेसीबी का सहारा लिया गया।उन्होंने आगे कहा कि पूसा के वैनी में एल्युमीनियम फैक्ट्री का अवैध रूप से संचालन हो रहा था। ऐसी जानकारी सामने आई है कि संबंधित पदाधिकारियों को इसकी जानकारी थी लेकिन उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। सिर्फ निबंधन कराने का एक नोटिस दिया और खानापूर्ति की। इसके बाद दुबारा जांच करना मुनासिब नहीं समझा। अगर उस समय ठोस कार्रवाई की जाती तो आज इतनी बड़ी घटना नहीं होती।उन्होंने कहा कि फैक्ट्री की मेंटेनेंस और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। इसकी जांच संबंधित पदाधिकारियों को नियमित तौर पर करनी थी लेकिन संबंधित पदाधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। आज भी जिले में दर्जनों फैक्ट्री ऐसे हैं जिसका निबंधन नहीं है और अवैध रूप से इसका संचालन किया जाता है, जहाँ मेंटेनेंस और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता। रखरखाव की घोर अनदेखी की जाती है। लेकिन अधिकारी इस पर ध्यान नहीं देते।नियमित जांच करने पर हादसे को टाला जा सकता है लेकिन अधिकारी जांच को लेकर सीरियस नहीं रहते। उक्त हादसे में संचालक के साथ-साथ संबंधित पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। खेग्रामस राज्य उपाध्यक्ष जीवछ पासवान ने कहा कि एल्युमिनियम फैक्ट्री हादसा बेहद दर्दनाक है। इसमें जो भी दोषी हो,उस पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। जांच में पता चला है कि फैक्ट्री में करीब 50 श्रमिक काम करते थे। हादसे के वक्त अधिकांश श्रमिक फैक्ट्री परिसर में थे जबकि कुछ किसी काम से बाहर चले गए थे। फैक्ट्री के अंदर बॉयलर वाली जगह के दूसरी तरफ एक दीवार के उस पार 13 महिलाएं भी नवनिर्मित एल्युमीनियम के बर्तनों की सफाई का काम कर रहीं थीं। दीवार होने की वजह से वे बाल-बाल बच गईं। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री चलाने के लिए जरूरी लाइसेंस नहीं लिए गए थे। न ही किसी स्तर से सही ढंग से फैक्ट्री की जांच पड़ताल की गई थी। बड़ा हादसा होने के बाद सभी जिम्मेदार पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।भाकपा-माले प्रखंड सचिव अमित कुमार ने कहा कि इस हृदयविदारक हादसा ने सभी को झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि जिस बॉयलर के फटने से इतना बड़ा हादसा हुआ, उसके 50 वर्ष से अधिक पुरानी होने की बात सामने आ रही है।



