सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल तेज रफ्तार या विभागीय लापरवाही
आखिर कौन लेगा जिम्मेदारी
आमने-सामने टक्कर ने खोली सुरक्षा इंतजामों की पोल
हादसों के बाद जांच नहीं, दुर्घटनाएं रोकने के लिए चाहिए ठोस कार्ययोजना
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर लगातार हो रहे सड़क हादसों ने यातायात सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और सुरक्षा इंतजामों में संभावित खामियों के बीच एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। वाहनों की आमने-सामने टक्कर जैसी घटनाएं सड़क सुरक्षा के दावों की पड़ताल करने के साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत भी उजागर करती हैं।
एक्सप्रेसवे का निर्माण तेज, सुगम और सुरक्षित आवागमन के उद्देश्य से किया जाता है, लेकिन दुर्घटनाओं का लगातार सामने आना इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। आखिर हादसों के पीछे केवल वाहन चालकों की लापरवाही है या सड़क की बनावट, संकेतकों, सुरक्षा अवरोधकों और निगरानी व्यवस्था में भी कोई कमी है? इन सवालों का निष्पक्ष तकनीकी परीक्षण जरूरी है। बिना जांच के किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराने के बजाय दुर्घटनास्थलों और हादसों के कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया जाना चाहिए।
तेज रफ्तार पर नियंत्रण और नियमित पेट्रोलिंग जरूरी
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित गति सीमा का कड़ाई से पालन, नियमित पुलिस पेट्रोलिंग और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा अवरोधकों की स्थिति की नियमित जांच भी होनी चाहिए। इसके साथ ही गलत दिशा में वाहन चलाने, लापरवाही से ओवरटेक करने और असुरक्षित तरीके से वाहन चलाने जैसी गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी जरूरी है।
अपराध और कानून-व्यवस्था के नजरिये से भी अहम है सुरक्षा
एक्सप्रेसवे की सुरक्षा केवल सड़क हादसों तक सीमित नहीं है। दुर्घटना के बाद तत्काल सहायता, घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था, आपातकालीन प्रतिक्रिया दल की सक्रियता और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पुलिस और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से दुर्घटनाओं के समय राहत कार्य तेज किए जा सकते हैं। किसी घटना में आपराधिक लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलने पर निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हादसों के बाद कार्रवाई नहीं, पहले रोकथाम पर जोर
सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुर्घटनाओं के बाद जांच और औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी कदम कब उठाए जाएंगे संबंधित विभागों को दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड तैयार कर ब्लैक स्पॉट चिह्नित करने, तकनीकी खामियों को दूर करने और सुरक्षा ऑडिट कराने की दिशा में गंभीरता दिखानी होगी। साथ ही, सुरक्षा उपायों की समीक्षा और उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की जानी चाहिए।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित सफर सुनिश्चित करना प्रशासन, पुलिस और संबंधित प्राधिकरणों की साझा जिम्मेदारी है। जरूरत इस बात की है कि हर दुर्घटना को एक अलग घटना मानकर छोड़ने के बजाय उससे सबक लिया जाए और सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों को समय रहते दूर किया जाए।
आखिरकार, सड़क पर नियमों का पालन और विभागों की जवाबदेही ही हादसों पर अंकुश लगाने का मजबूत आधार बन सकती है। लोगों की जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि विकास की रफ्तार किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द न बन जाए।




