लोग मर रहे हैं, समाज दुखी है आखिर कब थमेगा मौत बांटता शोर
डीजे का शोर बने जनस्वास्थ्य के लिए खतरा
घर सुलतानपुर फाउंडेशन ने उठाई आवाज
आस्था और उत्सव के नाम पर दूसरों की सेहत से खिलवाड़ क्यों? ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती की मांग
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
उत्सव की खुशी में गूंजता तेज शोर जब दूसरों के लिए परेशानी और स्वास्थ्य का खतरा बनने लगे, तो उस पर सवाल उठना लाजिमी है। धार्मिक आयोजनों, जुलूसों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में तेज आवाज में बजते डीजे तथा अत्यधिक कंपन को लेकर अब सामाजिक संवेदनशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही की जरूरत महसूस की जा रही है। घर सुलतानपुर फाउंडेशन ने ‘नो डीजे वाइब्रेशन अभियान’ के माध्यम से इस गंभीर समस्या की ओर समाज और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।
खुशी के नाम पर दूसरों की सेहत से समझौता क्यों?
धार्मिक आयोजन और उत्सव हमारी सामाजिक व सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा हैं। हर व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार आयोजन करने और खुशियां मनाने का अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में दूसरों के सुकून, स्वास्थ्य और सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जा सकती। तेज आवाज से बुजुर्गों, बच्चों, बीमारों और आम नागरिकों को परेशानी हो सकती है। लगातार शोर नींद में बाधा, तनाव और सुनने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में डीजे की तेज आवाज और कंपन से जुड़ी घटनाओं की खबरें समाज के सामने गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
आस्था का सम्मान, लेकिन नियमों का पालन भी जरूरी
घर सुलतानपुर फाउंडेशन की ‘नो डीजे वाइब्रेशन अभियान’ मुहिम का उद्देश्य किसी धर्म, परंपरा या उत्सव का विरोध करना नहीं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण और अत्यधिक कंपन से होने वाली परेशानियों को रोकना है। अभियान से जुड़े मुद्दे पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करते हुए ध्वनि प्रदूषण के निर्धारित मानकों, समय-सीमा और प्रतिबंधित क्षेत्रों से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के साथ ही अत्यधिक कंपन की शिकायतों की जांच भी जरूरी है।
सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं आयोजक और नागरिक
शोर पर नियंत्रण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जवाबदेही भी है। आयोजकों को ध्वनि की निर्धारित सीमा का ध्यान रखना चाहिए और नागरिकों को भी दूसरों की परिस्थितियों तथा स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उत्सव तभी सार्थक है, जब उसकी खुशी किसी दूसरे परिवार की परेशानी का कारण न बने। घर सुलतानपुर फाउंडेशन की इस मुहिम को जनहित से जोड़कर देखते हुए प्रशासन, आयोजकों और समाज को मिलकर प्रयास करना होगा, ताकि आस्था के साथ मानवीय संवेदनाओं की रक्षा भी सुनिश्चित हो सके।




