मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों की अनदेखी का आरोप, वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
फीस और परीक्षा को लेकर भी अभिभावकों की शिकायतें, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
विधान परिषद स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन के मद्देनजर विद्यालयों को बंद रखने संबंधी निर्देशों के बावजूद इंदिरा नगर के बुद्ध विहार, तकरोही स्थित BK कॉन्वेंट इंटर कॉलेज खुला रहने का मामला सामने आया है। विद्यालय में छात्र-छात्राओं के पहुंचने का वीडियो सामने आने के बाद जिलाधिकारी और शिक्षा विभाग के आदेशों के अनुपालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि बंदी के निर्देशों के बावजूद विद्यालय में पढ़ाई जारी रही। यदि संबंधित आदेश इस विद्यालय पर लागू थे, तो उनके बावजूद स्कूल खुलने की अनुमति कैसे मिली? अब प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि विद्यालय में बंदी के निर्देशों की अनदेखी का यह पहला मामला नहीं है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि विद्यालय को बंद रखने के संबंध में जारी आदेश की शर्तें क्या थीं, वह संबंधित विद्यालय पर लागू था या नहीं और यदि आदेश का उल्लंघन हुआ, तो जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन पर सवाल
चुनावी व्यवस्था के तहत नर्सरी से कक्षा 12 तक के विद्यालयों को बंद रखने संबंधी निर्देश जारी होने की बात कही जा रही है। ऐसे में BK कॉन्वेंट इंटर कॉलेज के खुले रहने का मामला प्रशासनिक निगरानी और आदेशों के अनुपालन से जुड़ गया है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि बंदी का आदेश लागू था, तो विद्यालय के संचालन पर समय रहते रोक क्यों नहीं लगाई गई? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की है। अब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
फीस जमा न होने पर परीक्षा से रोकने के आरोप
विद्यालय को लेकर कुछ अभिभावकों ने फीस जमा न होने पर विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने से रोकने का आरोप लगाया है। इसके अलावा कॉपी-किताब और अन्य शैक्षणिक सामग्री के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है। इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विद्यालय प्रबंधन का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
मामले में जिलाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) और संबंधित शिक्षा विभाग से चुनावी बंदी के आदेशों की लागू स्थिति स्पष्ट करने तथा अभिभावकों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है। साथ ही यह भी अपेक्षा की जा रही है कि जांच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि वीडियो और शिकायतों के सामने आने के बाद प्रशासन मामले को गंभीरता से लेकर जांच कराता है या नहीं।




