15 कसौटियों पर परखे जाएंगे मौजूदा विधायक, जनता की संतुष्टि से लेकर जातीय समीकरण तक होगी पड़ताल
दो सर्वे में कमजोर रिपोर्ट तो कट सकता है टिकट, जिताऊ चेहरे की तलाश में भाजपा-संघ का समानांतर फीडबैक
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने प्रत्याशी चयन की कवायद तेज कर दी है। पार्टी मौजूदा विधायकों के साथ ही संभावित दावेदारों की जमीनी पकड़ परखने के लिए अलग-अलग स्तरों से फीडबैक जुटाने की तैयारी में है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार टिकट वितरण में केवल मौजूदा विधायक का राजनीतिक प्रभाव ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में उनकी स्वीकार्यता, विकास कार्यों और संगठन के साथ समन्वय समेत कई पहलुओं को आधार बनाया जाएगा। भाजपा नेतृत्व की ओर से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संगठनात्मक समीक्षा और जमीनी फीडबैक का दौर भी जारी है।
15 पैरामीटर पर तैयार होगा विधायकों का रिपोर्ट कार्ड
मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन को करीब 15 प्रमुख मानकों पर परखे जाने की चर्चा है। इनमें क्षेत्र में कराए गए विकास कार्य, जनता के बीच स्वीकार्यता, कार्यकर्ताओं से संबंध, संगठन के साथ तालमेल, क्षेत्र में सक्रियता, जनसमस्याओं के समाधान और जातीय समीकरण जैसे पहलुओं का आकलन शामिल बताया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंधित विधायक की अपने विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ कितनी है और चुनावी परिस्थितियों में पार्टी के लिए उनकी उपयोगिता क्या रह सकती है।
केंद्रीय नेतृत्व और संघ का फीडबैक भी अहम
प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में केंद्रीय नेतृत्व के स्तर से मिलने वाली रिपोर्ट के साथ संघ से जुड़े जमीनी फीडबैक को भी महत्व दिए जाने की बात सामने आ रही है। भाजपा और आरएसएस के बीच मिशन-2027 को लेकर क्षेत्रवार समन्वय बैठकों की तैयारी और संगठनात्मक समीक्षा पहले से चल रही है।
समानांतर सर्वे से तलाशे जाएंगे नए चेहरे
पार्टी की नजर सिर्फ मौजूदा विधायकों के रिपोर्ट कार्ड पर नहीं है। हारी हुई सीटों और कम अंतर से जीती गई सीटों पर भी संभावित जिताऊ चेहरों की तलाश तेज होने की खबरें हैं। अलग-अलग स्रोतों से मिले फीडबैक को मिलाकर पार्टी नेतृत्व प्रत्याशी चयन की तस्वीर साफ कर सकता है।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जिन मौजूदा विधायकों की रिपोर्ट लगातार कमजोर आती है, उनके टिकट पर पुनर्विचार हो सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा चुनावी समीकरण, संगठनात्मक फीडबैक और अन्य आंतरिक आकलनों के आधार पर किया जाएगा। हालिया रिपोर्टों में भी कई मौजूदा विधायकों के टिकट को लेकर आंतरिक सर्वे और रिपोर्ट कार्ड की चर्चा सामने आई है।




