सुशांत गोल्फ सिटी का जिम्मा अब LDA के हाथ करीब पांच हजार आवंटियों को राहत की उम्मीद
अधूरे विकास कार्य पूरे कराएगा प्राधिकरण
लखनऊ उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
सुशांत गोल्फ सिटी के हजारों होम बायर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। अंसल एपीआइ की इस बहुचर्चित परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के हाथों सौंपने के प्रस्ताव को प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद करीब पांच हजार वैध आवंटियों को उनके भूखंड और भवन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से अपने आशियाने की राह देख रहे आवंटियों के लिए सरकार का यह फैसला बड़ी उम्मीद लेकर आया है।अब परियोजना को LDA टेकओवर करेगा और अधूरे पड़े विकास कार्यों को पूरा कराने की जिम्मेदारी भी प्राधिकरण की होगी। परियोजना में सब स्टेशन, पेयजल, सीवर, ड्रेनेज समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई काम अधूरे बताए जा रहे हैं। इन कार्यों को पूरा कराने के लिए करीब 2,216 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।2,912 करोड़ की देनदारी, अधूरे कामों पर भी खर्च होगा भारी भरकम बजटसुशांत गोल्फ सिटी परियोजना पर करीब 2,912 करोड़ रुपये की देनदारी बताई जा रही है। ऐसे में परियोजना को पटरी पर लाना LDA के लिए भी बड़ी चुनौती होगी। प्राधिकरण को न केवल वैध आवंटियों के हितों की रक्षा करनी होगी, बल्कि वर्षों से अधूरे पड़े बुनियादी विकास कार्यों को भी पूरा कराना होगा।सरकार के फैसले से उन आवंटियों में उम्मीद जगी है, जिन्होंने अपने घर या भूखंड के लिए वर्षों पहले रकम जमा की थी, लेकिन परियोजना के विवाद और अधूरे विकास कार्यों के कारण उन्हें अब तक अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। LDA के टेकओवर के बाद परियोजना के विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।बंधक भूखंड बेचने के आरोप से बढ़ा विवाद, NCLT के सामने रखा जाएगा पूरा मामलाअंसल एपीआइ पर परियोजना में अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप भी लगे हैं। LDA की ओर से अंसल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। आरोप है कि प्राधिकरण के पास बंधक रखे गए 3,489 भूखंडों में से 2,747 भूखंड बेच दिए गए। इस मामले ने परियोजना के विवाद को और गंभीर बना दिया है।अब अंसल से जुड़े पूरे मामले और परियोजना की देनदारियों को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के समक्ष भी रखा जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद निगाहें इस बात पर रहेंगी कि LDA परियोजना को किस तरह अपने नियंत्रण में लेकर वैध आवंटियों को उनके भूखंड और भवन उपलब्ध कराता है। वर्षों से अटके इस प्रोजेक्ट में सरकारी हस्तक्षेप के बाद अब हजारों परिवारों को अपने आशियाने का सपना पूरा होने की उम्मीद बंधी है।




