सियासत, अब भतीजी दीपिका पर भरोसे का संकेत**मायावती का बड़ा फैसला: भाई आनंद के किसी बेटे को बसपा में नहीं मिलेगा राजनीतिक पद
दीपिका को जिम्मेदारी का रास्ता खुला
परिवारवाद के आरोपों के बीच ‘बहनजी’ का नया दांव
आकाश-ईशान के बाद दीपिका आनंद के नाम से गरमाई बसपा की सियासत
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश कुमार
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने अपने परिवार और पार्टी के भविष्य को लेकर बड़ा सियासी संदेश दिया है। बड़े भतीजे आकाश आनंद और छोटे भतीजे ईशान आनंद के राजनीतिक भविष्य पर विराम लगाते हुए मायावती ने साफ कर दिया है कि उनके भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को अब बसपा में छोटे या बड़े राजनीतिक पद पर जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने पहली बार अपनी भतीजी कुमारी दीपिका आनंद के लिए पार्टी में जिम्मेदारी का रास्ता खुला रखा है।मायावती ने शनिवार को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लंबी पोस्ट में अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह उनका ‘अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा’ है कि आनंद कुमार के किसी बेटे को बसपा में राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। यानी आकाश और ईशान के बाद अब उनके परिवार की अगली पीढ़ी के बेटों के लिए भी पार्टी की राजनीति के दरवाजे बंद रहेंगे।दीपिका के लिए खुला दरवाजा, उत्तराधिकारी की चर्चा तेजमायावती ने इसी पोस्ट में अपनी भतीजी दीपिका आनंद का नाम लेकर सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए परिवार के किसी अन्य सदस्य की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद को साथ ले सकते हैं। उसकी ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखते हुए उसे पार्टी में जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं और अब तक सक्रिय राजनीति से दूर रही हैं।मायावती के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या बसपा के भावी नेतृत्व के लिए अब ‘आकाश मॉडल’ की जगह ‘दीपिका मॉडल’ तैयार किया जा रहा है। हालांकि मायावती ने दीपिका को अपना औपचारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है, लेकिन उन्हें भविष्य में पार्टी की जिम्मेदारी देने का संकेत जरूर दिया है।
परिवारवाद पर मायावती की सफाई, कांशीराम का भी दिया हवालामायावती ने अपने फैसले को परिवारवाद से जोड़कर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह बसपा संस्थापक कांशीराम की शिष्या हैं और पार्टी को परिवारवादी राजनीति का केंद्र नहीं बनने देंगी। उनके मुताबिक, अविवाहित होने के कारण सुरक्षा और देखभाल जैसी जरूरतों के चलते उन्हें अपने छोटे भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा। आनंद कुमार लंबे समय से उनकी निगरानी में पार्टी से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं।मायावती ने साफ संकेत दिया कि भाई के साथ होने का लाभ अब उनके बच्चों को राजनीतिक विरासत के रूप में नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी के मोह में पड़कर वह पार्टी और बहुजन आंदोलन के हितों को नुकसान नहीं होने देंगी।
आकाश के बाद ईशान भी बाहर, अब निगाहें दीपिका पर
मायावती का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पिछले दिनों बसपा में आकाश आनंद और ईशान आनंद को लेकर लगातार बड़े बदलाव हुए हैं। आकाश आनंद को हाल ही में संगठनात्मक जिम्मेदारी से हटाया गया था। इसके बाद ईशान आनंद को बड़ी जिम्मेदारी दी गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद मायावती ने दोनों भतीजों को भविष्य में किसी भी राजनीतिक पद से दूर रखने का स्पष्ट संदेश दे दिया।अब मायावती की नजर अपनी भतीजी दीपिका आनंद पर टिकने की चर्चा है। यदि दीपिका पार्टी की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होती हैं तो मायावती ने दलित समाज के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी देने का विकल्प भी खुला रखा है। इससे साफ है कि बसपा सुप्रीमो परिवार और पार्टी संगठन के बीच संतुलन साधते हुए उत्तराधिकार के सवाल को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश कर रही हैं।




