तिलौथू/रोहतास /Etv News 24/ संवाददाता हैदर अली
तिलौथू प्रखंड कार्यालय अवस्थित सोनू कुमार सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक ने बताया कि गेहूं के बाद गरमा धान का उत्पादन से फसल तीव्रता बढ़ाने में सहयोग मिलता है।और गरमा धान से डबल मुनाफा होता है किसानों को।प्रखंड के किसान मिथिलेश कुमार ग्राम,सोनपुरा, पंचायत- चंदनपुरा, प्रखंड – तिलौथू, रोहतास के निवासी हैं तथा खेती एवं समाजसेवा करते हैं। गाँव में मुख्य रूप से धान-गेहूं का फसलचक्र है। किसान मेला एवं किसान गोष्ठी में, आत्मा एवं कृषि विभाग के प्रसार कर्मी द्वारा गरमा में मूंग, ढैंचा एवं धान की खेती करने के बारे में जानकारी मिलती रही है, जिसके कारण कुछ वर्षों से गेहूं की कटनी के बाद गरमा फसलों का प्रचलन इलाके में तेज हुआ है। कई किसानों द्वारा गरमा मूंग की खेती किया जा रहा है। कुछ वर्षों से इलाकों में मई-जून-जुलाई में अच्छी बारिश हो रही है। किसान गोष्ठी में बताया गया कि, उत्तर-पूर्व के राज्यों में सालों भर धान की खेती की जाती है, इसी से प्रभावित होकर सीखने के उद्देश्य से आसपास के गाँव में कुछ वर्षों से गरमा धान की खेती किया जा रहा है।अप्रैल के अंतिम सप्ताह में गरमा धान के बीज को नर्सरी में डाल दिया जाता है, जिसे मई के अंतिम सप्ताह से जून के प्रथम सप्ताह में मुख्य खेत में रोपण किया जाता है। रोपण के समय उर्वरक का इस्तेमाल केवल एक बार किया जाता है, जिससे लागत खर्च कम हो जाती है तथा रोग आदि कम लगता है और उपज अच्छी रहती है। 90-120 दिनों में (सितंबर के दूसरे सप्ताह तक) गरमा धान की फसल पूरी तरह तैयार हो जाता है। कटनी के समय गरमा धान में नमी की मात्रा 20% से अधिक होती है, मगर नगदी फसल की तरह इसकी बिक्री खेतों से ही हो जाती है और बेचने के लिए किसानों को अतिरिक्त मेहनत भी नहीं करनी पड़ती है। सामान्य स्थिति में 15-17 क्विंटल प्रति एकड़ (नमी के साथ) गरमा धान की उपज हो जाती है।
वर्तमान समय में प्रखंड के कई गाँवों (रेडिया, सोनपुरा, मलपुरा, बहेरा कैथी, भदोखरा, चितौली, सेवही, सरैया, तिलौथू पश्चिमी, चुरेसर, रामडीहरा एवं अन्य) के 500 से अधिक किसानों द्वारा गरमा धान के प्रभेद जया, सरजू 52 एवं उषा की खेती कृषि विभाग के मदद से प्रचलित हो रही है, जिसका अनुमानित क्षेत्र 450-500 एकड़ है।
प्रखंड के अन्य किसान (पवन कुमार यादव, दारा सिंह एवं अनिल कुमार) के अनुसार गरमा धान से मुख्यतः चूड़ा बनाया जाता है, जो स्वादिष्ट और उच्च गुणवत्ता वाला होता है। गरमा धान के बाद आलू की फसल ली जाती है, जिससे एक अतिरिक्त फसल खेत से प्राप्त होता है और खेत की फसल तीव्रता बढ़ जाती है। किसान गरमा धान से अतिरिक्त मुनाफा प्राप्त कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। इलाके में गरमा धान की खेती कुछ वर्षों में प्रचलित रही है एवं लगातार किसान इसके प्रति आकर्षित हो रहे हैं और अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं।




