सासाराम रोहतास / Etv News 24
अब मृत बाप- दादा या अन्य पूर्वजों के नाम दर्ज जमीन का नामांतरण कराने के लिए वर्षों तक अंचल कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐसी व्यवस्था लागू की है, जिसमें राजस्व कर्मी खुद गांव- गांव जाकर मृत जमाबंदी धारकों की पहचान करेंगे और उत्तराधिकारियों के नाम पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया कराएंगे।विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और डीएम को मास्टर सर्कुलर जारी कर इस व्यवस्था को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया है। विभाग का उद्देश्य वर्षों से लंबित उत्तराधिकार आधारित नामांतरण के मामलों का तेजी से निपटारा करना और भूमि अभिलेखों को अद्यतन बनाना है। अभी तक मृत जमाबंदी धारक के उत्तराधिकारी को स्वयं आवेदन देना पड़ता था।जानकारी के अभाव, पारिवारिक विवाद या उदासीनता के कारण बड़ी संख्या में जमीन आज भी मृत पूर्वजों के नाम पर दर्ज है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक ऋण और अन्य राजस्व कार्यों में परेशानी होती है। विभाग का अनुमान है कि राज्य के 60 प्रतिशत से अधिक भूधारी इस समस्या से प्रभावित हैं।उत्तराधिकारियों से संपर्क कर सहमति पत्र लिए जाएंगे नई व्यवस्था के तहत राजस्व कर्मचारी पंचायत की जन्म-मृत्यु पंजी, चौकीदार की रिपोर्ट, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से मिली सूचना के आधार पर मृत जमाबंदी धारकों की सूची तैयार करेंगे। इसके बाद वैध उत्तराधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज और सहमति पत्र प्राप्त करेंगे। सात दिनों के भीतर कागजात मिलने पर बंटवारा आधारित दाखिल- खारिज की कार्रवाई शुरू होगी। यदि बंटवारा नहीं होता है तो उत्तराधिकार आधारित नामांतरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।रिपोर्ट के आधार पर खुद सीओ करेंगे दाखिल-खारिज राजस्व कर्मचारी की रिपोर्ट के आधार पर अंचल अधिकारी ऑनलाइन पोर्टल पर सुओ-मोटो (स्वतः संज्ञान) लेते हुए दाखिल- खारिज की कार्रवाई पूरी करेंगे। पूरी प्रक्रिया बिहार भूमि पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज होगी। विभाग ने प्रत्येक राजस्व कर्मचारी को हर माह कम से कम पांच मृत जमाबंदी मामलों का निष्पादन करने का लक्ष्य दिया है। अपर समाहर्ता और अंचल अधिकारी इसकी नियमित समीक्षा करेंगे।




