तिलौथू रोहतास/Etv News 24
इस्लामी इतिहास में मोहर्रम का महीना विशेष महत्व रखता है। इसी महीने की 10वीं तारीख, जिसे यौम-ए-आशूरा कहा जाता है, में नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद ﷺ के नवासे, हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु ने करबला के मैदान में शहादत का जाम पिया। उनकी शहादत सत्य, न्याय, धैर्य और इस्लामी मूल्यों की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण है।सन 61 हिजरी (680 ईस्वी) में जब यज़ीद ने अपनी बैअत का दबाव बनाया, तब इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु ने अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने से इंकार कर दिया। वे अपने परिवार और कुछ साथियों के साथ मदीना से मक्का और फिर कूफ़ा की ओर रवाना हुए। रास्ते में उन्हें करबला के मैदान में रोक लिया गया। यज़ीद की सेना ने उनके काफिले पर पानी तक बंद कर दिया, जिससे बच्चे, महिलाएं और साथी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में आ गए।10 मोहर्रम को करबला की धरती पर इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु के 72 वफ़ादार साथियों ने बहादुरी के साथ लड़ते हुए शहादत प्राप्त की। अंततः स्वयं इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु भी अल्लाह की राह में शहीद हो गए।

उनकी यह कुर्बानी किसी सत्ता या सांसारिक लाभ के लिए नहीं थी, बल्कि इस्लाम की शिक्षाओं, इंसाफ और मानवता की रक्षा के लिए थी। करबला की घटना आज भी दुनिया को यह संदेश देती है कि सत्य और न्याय के लिए संघर्ष करना चाहिए, चाहे परिस्थितियां कितनी ही कठिन क्यों न हों। इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत साहस, सब्र, त्याग और ईमानदारी का प्रतीक है। मोहर्रम के अवसर पर पूरी दुनिया के मुसलमान उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं तथा उनके बताए हुए सत्य और इंसाफ के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।आज जहां इमाम हुसैन की याद में ताजिया और अलम निशान निकला गया।हर जगह मीठे शरबत और ठंडे पानी की शबील बांटी गई।शांति पूर्वक ढंग से मोहर्रम का जुलूस तय शुदा मार्ग से खलीफा और उनके सहायक की सहायता के साथ पुलिस प्रशासन मजिस्ट्रेट की भी निगरानी कदम कदम पर मिलती रही।बहुत सारे जनता के प्रतिनिधि जिसमें तिलौथू पूर्वी मुखिया प्रतिनिधि सत्येंद्र द्विवेदी,उप मुखिया अजीत कुमार, मजिस्ट्रेट मिथिलेश यादव,सहित दर्जनों समाज सेवी वो प्रतिनिधि,तिलौथू थानाध्यक्ष शुभम कुमार अपने पुरुष एवं महिला आरक्षियों सहित दो चौकीदार बादशाह यादव और राजेंद्र पासवान का सहयोग जुलूस को शुरू से अंत तक मिला।शांति पूर्वक ढंग से जुलूस अपने तय शुदा मार्ग से होते हुए वापस चौक पर पहुंच कर समाप्त हुआ।



