सासाराम (रोहतास)Etv News 24
रोहतास जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से जारी एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, तिलौथू प्रखंड के उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मैकू राम के विरुद्ध कथित फर्जी STET प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने के आरोप में अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष दायर एक परिवाद में आरोप लगाया गया था कि संबंधित शिक्षक ने फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नियोजन प्राप्त किया। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग द्वारा कई बार संबंधित अभिलेखों, मूल प्रमाण-पत्र तथा सत्यापन संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। हालांकि निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा कर दी।यह मामला केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि जांच में आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह उन हजारों योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने अपनी मेहनत और योग्यता के बल पर प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं।फर्जीवाड़े पर क्यों नहीं होती समय पर कार्रवाई?जिले में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि ऐसे मामलों में वर्षों तक कार्रवाई लंबित क्यों रहती है। यदि आरोपों में सच्चाई है तो केवल संबंधित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि नियुक्ति और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का कहना है कि प्रशासन का दायित्व किसी भी आरोपी को संरक्षण देना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाना और दोषियों को कानून के दायरे में लाना है। यदि फर्जीवाड़े के मामलों में नरमी बरती जाती है तो इससे जनता का प्रशासन पर विश्वास कमजोर होगा।डीडीसी से निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षाअब पूरे जिले की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हुई हैं। आम लोगों की अपेक्षा है कि उप विकास आयुक्त (डीडीसी) अपने पद की गरिमा और प्रशासनिक निष्पक्षता को बनाए रखते हुए मामले की गहन एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित करें। किसी भी प्रकार के दबाव, प्रभाव या पक्षपात से ऊपर उठकर सत्य को सामने लाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जनता की मांग है कि यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो केवल विभागीय कार्रवाई तक मामला सीमित न रहे, बल्कि संबंधित प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई भी की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करने का दुस्साहस न कर सके।सरकारी नौकरी जनता के टैक्स के पैसे से संचालित व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी सेवा में बना रहता है, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि समाज और व्यवस्था के साथ विश्वासघात भी माना जाएगा।अब रोहतास की जनता यह देखना चाहती है कि प्रशासन कानून और पारदर्शिता के पक्ष में खड़ा होता है या फिर इस मामले की सच्चाई पर पर्दा डालने की कोशिश की जाती है।



