कोचस रोहतास/ Etv News 24/ ब्यूरो रिपोर्ट- रमेश पांडेय
कोचस प्रखंड मुख्यालय स्थित राजकीय मध्य विद्यालय कोचस के छः से आठवीं तक की कक्षा में कार्यरत शिक्षक पीएमश्री प्लस टू विद्यालय में कार्य कर रहे है, परंतु नामांकित बच्चे इसी विद्यालय में अभी पढ़ रहे हैं.जिला शिक्षा पदाधिकारी रोहतास के आदेश के हवाला देते हुए गत एक अप्रैल को प्रभारी प्रधानाध्यापक सह प्रभारी बीइओ अरविन्द कुमार ने उक्त कक्षा के छह शिक्षकों को पीएमश्री प्लस टू स्कूल तो भेज दिया, लेकिन छात्रों को वहां जाने का कोई व्यवस्था नहीं की गयी.जबकि, स्कूल में अधिक बच्चे आने एवं शिक्षक की कमी के मार कार्यरत पांचवी तक के कार्यरत शिक्षकों को झेलनी पड़ रही है.इस सम्बन्ध में पीएम पोषण योजना के प्रखंड प्रभारी संतोष कुमार ने बताया कि छः से आठवीं तक की बच्चों के मध्याह्न भोजन के लिए सारी सुविधाएं पीएम श्री प्लस टू स्कूल में उपलब्ध करा दी गयी.जबकि, एमडीएम का रिपोर्ट शिक्षा विभाग को अभी भी मध्य विद्यालय कोचस से भेजा जा रहा है.उन्होंने बताया कि दो अप्रैल को विद्यालय में जांचोपरान्त पाया कि आवश्यकता से अधिक चावल स्कूल के गोदाम में उपलब्ध था.इसका अर्थ हुआ स्कूल में खाना कम बना और बच्चों का उपस्थिति अधिक बनया गया,जो किसी तरह ठीक नहीं कहा जायेगा.इसमें सबसे हैरानी की बात है कि एक से चार अप्रैल के बीच मिडिल स्कूल कोचस में बना एमडीएम का रिपोर्ट अब तक ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है.जबकि,प्रतिदिन का रिपोर्ट उक्त पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश संबंधित प्रधानाध्यापकों को दिया गया है.इधर,बिहार विकास मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष खेदन प्रसाद सिंह,सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद दूबे,भाजपा नेता मुन्ना मिश्रा,बीडीसी कविन्द्र पाल,गोपी कुमार चौबे,राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रखंड अध्यक्ष धनंजय शर्मा आदि अन्य लोगों ने सवाल उठाया है कि किस परिस्थितियों में पहले शिक्षकों को मिडिल स्कूल से विरमित किया गया और कक्षा छह से आठ तक के नामांकित करीब 546 बच्चों को अधर में रखा गया.जबकि,पहले बच्चों को पीएमश्री विद्यालय में शिफ्ट करनी चाहिए थी तब उसके बाद शिक्षक को भेजना चाहिए था.लेकिन,कोचस में ठीक उल्टा हो रहा है.इसका जिम्मेदार कौन है, जिसके कारण ऐसे कारनामें शिक्षा विभाग में देखने को मिल रही है.शिक्षा विभाग के स्थानीय अधिकारियों के विक्षुब्ध रवैये से आक्रोशित लोगों ने इस मामले में रोहतास डीएम से हस्तक्षेप करने की मांग की है.



