रैयतों के हितों की सुरक्षा के साथ एक्सप्रेसवे निर्माण में गति लाने की पहल
भभुआ, कैमूर | Etv News 24
भारत सरकार की महत्त्वाकांक्षी भारत माला परियोजना के तहत वाराणसी–रांची–कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण हेतु कैमूर जिले के विभिन्न अंचलों में चिन्हित एवं अधिग्रहित भूमि पर निर्माण कार्य और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तीव्र गति से जारी है।इसी क्रम में जिला प्रशासन, कैमूर द्वारा एक महत्त्वपूर्ण निर्णय लेते हुए यह निर्देश जारी किया गया है कि अधिग्रहित भूमि पर आगामी धान की फसल न लगाई जाए, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो और रैयतों को किसी प्रकार का आर्थिक या विधिक नुकसान न झेलना पड़े।निर्माण कार्य बाधित होने की आशंका व रैयतों की संभावित हानिजिला भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा यह अवगत कराया गया है कि कुछ रैयतों द्वारा उन भू-खंडों पर धान की रोपनी की तैयारी की जा रही है, जिन्हें पहले ही भारतमाला परियोजना के लिए अधिग्रहित किया जा चुका है। इन भूमि पर निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है अथवा शीघ्र प्रारंभ होने वाला है। यदि ऐसे भूखंडों पर फसल लगाई जाती है, तो यह न केवल परियोजना कार्य में बाधा उत्पन्न करेगा, बल्कि रैयतों को फसल नष्ट होने, मुआवजा वितरण में असमंजस एवं संभवतः कानूनी जटिलताओं का भी सामना करना पड़ सकता है।सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गयाजिलाधिकारी श्री सुनील कुमार ने इस विषय में एक स्पष्ट आदेश जारी करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी (भभुआ), अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी तथा सभी अंचलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के रैयतों से संवाद स्थापित करें और उन्हें इस निर्णय से अवगत कराएं। यह सुनिश्चित किया जाए कि अधिग्रहित भूमि पर किसी प्रकार की खेती विशेषकर धान की रोपनी न हो।जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि यदि उक्त निर्देशों का उल्लंघन कर किसी रैयत द्वारा अधिग्रहित भूमि पर कृषि कार्य किया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को चिन्हित कर उनके विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।रैयतों को जानकारी देना प्रशासन की प्राथमिकताप्रशासन की मंशा किसी भी रैयत को परेशान करने की नहीं है, बल्कि समय रहते सही जानकारी देकर उन्हें अनावश्यक निवेश, श्रम एवं नुकसान से बचाना है। इसके लिए कृषि विभाग एवं राजस्व विभाग को संयुक्त रूप से निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित क्षेत्रों में जाकर जागरूकता अभियान चलाएं और व्यक्तिगत व सामूहिक संवाद के माध्यम से रैयतों को परियोजना से संबंधित दिशा-निर्देशों की जानकारी दें।यह अभियान विशेष रूप से उन राजस्व ग्रामों में संचालित किया जाएगा जो एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में आते हैं।पारदर्शी प्रक्रिया एवं रैयतों के हित सर्वोपरिप्रशासन ने यह दोहराया है कि इस परियोजना को रैयतों के आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए, पारदर्शिता के साथ क्रियान्वित किया जाएगा। मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है और रैयतों को यथाशीघ्र उनके हक का भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है।भूमि अधिग्रहण से जुड़े विभागों एवं परियोजना से संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे रैयतों की सुविधा, जानकारी और संतुष्टि को प्राथमिकता दें।जिला प्रशासन की अंतिम अपीलजिला प्रशासन, कैमूर सभी संबंधित रैयतों से यह विनम्र अपील करता है कि वे अधिग्रहित भूमि पर आगामी किसी भी प्रकार की फसल, विशेषकर धान की रोपनी, से परहेज करें। प्रशासन से नियमित संपर्क में रहें, और समय-समय पर जारी किए जा रहे निर्देशों का पालन करें।यह कदम न केवल रैयतों के आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए है, बल्कि भारत माला परियोजना के सुचारु, समयबद्ध एवं सफल क्रियान्वयन हेतु भी आवश्यक है।



