मौजूदा समय और शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु-सुखदेव एवं इंकलाबी कवि “पाश” के सपनों का भारत विषयक संगोष्ठी का हुआ आयोजन
दीपक सिन्हा द्वारा लिखित पुस्तक “सिगरेट का कश” एवं डा० संगीता कुमारी द्वारा लिखित पुस्तक “राजमणि राय ‘मणि’ के गीतों का भाव एवं शिल्प” का विमोचन किया गया
प्रियांशु कुमार समस्तीपुर बिहार/Etv News 24
समस्तीपुर जन संस्कृति मंच समस्तीपुर के बैनर तले रविवार को शहर के मालगोदाम चौक स्थित भाकपा माले जिला कार्यालय में शहीदी मिलन-शहादत दिवस का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के शुरू में राजगुरु, सुखदेव, एवं इंकलाबी कवि “पाश” को याद करते हुए शहीद-ए-आजम भगत सिंह की तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया।तत्पश्चात “मौजूदा समय और शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु सुखदेव एवं इंकलाबी कवि “पाश” के सपनों का भारत” विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चर्चित बुद्धिजीवी जसम के जिला अध्यक्ष डा० प्रभात कुमार ने की। कार्यक्रम का संचालन सह सचिव अरविंद आनंद ने किया।गोष्ठी के शुरूआत में दीपक सिन्हा लिखित पुस्तक “सिगरेट का कश” एवं डा० संगीता कुमारी द्वारा लिखित पुस्तक “राजमणि राय ‘मणि’ के गीतों का भाव एवं शिल्प” का विमोचन डा० सुरेंद्र प्रसाद सुमन, डा० प्रभात कुमार, शाहजफर ईमाम ने किया। मौके पर लेखक द्वय को जसम के राज्य कार्यकारिणी सदस्य डा० सुरेंद्र प्रसाद सुमन एवं डा० प्रभात कुमार ने नागार्जुन सम्मान देकर सम्मानित किया।गोष्ठी को संबोधित करते हुए बतौर अतिथि जलेस के जिला अध्यक्ष शाह जफर ईमाम ने कहा कि भगत सिंह ने बहरों को सुनाने के लिए सेंट्रल असेंबली में बम फेंका था। आज चाहे बिहार की सरकार हो या फिर केंद्र सरकार छात्र, नौजवान, किसान, मजदूर की समस्यायों को सुनने को तैयार नहीं है। आज भी भारत अमेरिकी साम्राज्यवाद का पिछलग्गू बना हुआ है। देश की गंगा-जमुनी तहजीब खतरे में है। चाहे शोषण- अत्याचार हो या फिर गैर बराबरी हो, भगत सिंह के रास्ते पर चलकर ही इसका मुकाबला किया जा सकता है। भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने के लिए हमें तमाम मतभेदों को दरकिनार कर निर्णायक संघर्ष के रास्ते को अपनाना होगा।जसम के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डा० सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने कहा कि मौजूदा समय जैसा क्रूर समय भारतीय इतिहास में आया ही नहीं था और इसी बर्बरता को कूचलकर भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और पाश के सपनों का भारत बनाने की चुनौती हमें स्वीकार करनी होगी।गोष्ठी को संबोधित करते हुए जसम के राज्य सचिव दीपक सिन्हा ने कहा कि सबसे ख़तरनाक है हमारे सपनों का मर जाना। उन्होंने कहा कि आज के फासीवादी दौर में शहर से लेकर गांव तक हमें सांस्कृतिक आयोजन को लेकर जाने की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए।अपने अध्यक्षीय संबोधन में चर्चित बुद्धिजीवी जसम के जिला अध्यक्ष डा० प्रभात कुमार ने कहा कि भगत सिंह साम्यवाद, मार्क्सवाद से प्रभावित थे। वे जनता के मुद्दे पर लड़ना पसंद करते थे। आजादी की लड़ाई में हजारों हजार लोगों ने शहादत दी लेकिन व्यक्ति नहीं विचार महत्वपूर्ण होता है और भगत सिंह संपूर्ण विचारधारा का नाम है। भगत सिंह ने कहा कि क्रांतिकारियों के लिए दो चीजें जरूरी हैं: एक आलोचना और दूसरा स्वतंत्र चिंतन। आज नक्सली कह कर तो लोगों को मारा ही जा रहा है लेकिन जो लोग अखबार में लिखते हैं, कविता लिखते हैं, कहानी, आलोचना लिखते हैं या जो जनता के बीच काम करते हैं उन्हें अर्बन नक्सली कहकर या तो जेल में बंद कर दिया जाता है या हत्या कर दी जाती है। संघर्ष की कहानी, कविता, आलोचना को छात्रों के सिलेबस से हटाया जा रहा है। देश में हिंदू- मुस्लिम को बांटने की कोशिश की जा रही है। चाहे किसानों का संघर्ष हो, मजदूरों का संघर्ष हो या फिर छात्र- नौजवान- महिलाओं का संघर्ष हो सबको बांटने की कोशिश की जा रही है। हमें भगत सिंह के बताए रास्ते पर चलकर ही फासीवादी निजाम को उखाड़ फेंककर धर्मनिरपेक्ष भारत को मजबूत बनाने की ओर अग्रसर होना होगा।गोष्ठी को जसम के दरभंगा जिला सचिव समीर कुमार, भाकपा माले जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह, जिला सचिव उमेश कुमार, अशोक कुमार, डा० संजय कुमार, पुनीत कुमार पाठक, प्रमोद यादव, रूपक कुमार, डॉ.संगीता कुमारी समेत दर्जनों वक्ताओं ने संबोधित किया। अंत में जसम राज्य कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद यादव एवं पुनीत कुमार के जनगीत से कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की गई।



