उत्तर प्रदेश/इलाहाबाद/न्यूज डेस्क/लखनऊ /हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि जीजा-साली के बीच संबंध गलत है लेकिन अगर लड़की बालिग है तो इसे दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में आरोपी पति को जमानत दे दी है। जिसमें उस पर अपनी साली से बलात्कार का आरोप लगा था। अदालत का मानना है कि भले ही जीजा-साली का रिश्ता समाज में अनैतिक माना जाता हो, लेकिन अगर महिला वयस्क है तो इस रिश्ते को बलात्कार नहीं कहा जा सकता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हो सकते हैं। अदालत को बताया गया कि जीजा-साली के बीच पहले से ही संबंध थे और पीड़िता ने शुरुआत में पुलिस को दिए बयान में भी इन आरोपों से इनकार किया था। बाद में उसने अपना बयान बदलकर आरोपों का समर्थन किया।
कोर्ट ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि पीड़िता वयस्क है और उसने स्वेच्छा से आरोपी के साथ संबंध बनाए थे। अदालत ने कहा कि भले ही यह रिश्ता समाज की नजर में गलत हो, लेकिन कानूनी तौर पर इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता। आरोपी के पक्ष में यह भी तथ्य रहा कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उसे जुलाई 2024 में गिरफ्तार किया गया था। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी।
बता दें कि सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि कथित पीड़ित लड़की बालिग है और उने 161 के तहत दिए बयान में आरोपों से इनकार किया था। और बाद में 164 के तहत बयान को बदल दिया था और अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन किया था।



