संजय निषाद की दो टूक—आरक्षण पर निर्णय नहीं तो दूसरे विकल्प पर करेंगे विचार
अखिलेश यादव को गोरखपुर की किसी भी सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दिल्ली की रैली में
कानून-व्यवस्था सामाजिक उत्पीड़न और राजनीतिक हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया; बोले—सत्ता बदलने की ताकत जनता के वोट में
लखनऊ उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश
लखनऊ/नई दिल्ली। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘दिल्ली चलो’ कार्यक्रम के दौरान मछुआ समाज के आरक्षण, सामाजिक उत्पीड़न, कानून-व्यवस्था और आगामी विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से निषाद समाज के आरक्षण पर जल्द स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि आरक्षण के मुद्दे पर ठोस जवाब नहीं मिलता है तो पार्टी दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर विचार करने के लिए स्वतंत्र होगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन का अंतिम निर्णय पार्टी की कोर कमेटी और सभी 75 जिलों से राय लेने के बाद ही किया जाएगा।

डॉ. संजय निषाद ने विजयादशमी का उल्लेख करते हुए कहा कि बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व तभी सार्थक होगा, जब निषाद समाज को उसका अधिकार मिलेगा। उनके मुताबिक, दिल्ली में जुटे समाज के लोगों की मुख्य अपेक्षा मछुआ आरक्षण के मुद्दे पर ठोस पहल की है। उन्होंने कहा कि समाज को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना होगा।
भाजपा से आरक्षण पर स्पष्ट जवाब की मांग
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि केंद्र और प्रदेश, दोनों जगह भाजपा की सरकार है। ऐसे में निषाद समाज के आरक्षण के सवाल पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी भी सरकार की है। उन्होंने कहा कि वह अंतिम समय तक भाजपा के जवाब का इंतजार करेंगे, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि समाज के हितों से समझौता किया जाएगा। यदि आरक्षण पर कोई ठोस निर्णय नहीं होता है तो पार्टी को दूसरे राजनीतिक विकल्प तलाशने पड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी अपने मुद्दों को लेकर किसी भी राजनीतिक दल से बातचीत कर सकती है। हालांकि, किस दल के साथ गठबंधन किया जाएगा, इसका फैसला व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि पार्टी की कोर कमेटी और 75 जिलों के पदाधिकारियों की राय के आधार पर होगा। इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव-2027 से पहले निषाद पार्टी की राजनीतिक रणनीति के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव को गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए डॉ. संजय निषाद ने गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव-2018 और विधानसभा चुनाव-2022 का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में इंजीनियर प्रवीण निषाद की जीत में निषाद पार्टी और पीस पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
उन्होंने समाजवादी पार्टी से अलग होने के कारणों पर भी सवाल उठाए।
डॉ. संजय निषाद ने अखिलेश यादव को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर की किसी भी सीट से उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि वह अपने दम पर चुनाव लड़ने और निषाद समाज के समर्थन को साबित करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि निषाद पार्टी वर्ष 2022 में 16 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और इनमें से 11 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस आधार पर उन्होंने पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को अपनी राजनीतिक ताकत बताया।
उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी केवल सीटों की संख्या नहीं, बल्कि चुनावी जीत और अपने समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी को महत्व देती है। उनके संबोधन से स्पष्ट हुआ कि पार्टी वर्ष 2027 के चुनाव में आरक्षण के मुद्दे के साथ अपनी राजनीतिक ताकत और स्वतंत्र पहचान को भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।
कानून-व्यवस्था और सामाजिक उत्पीड़न पर जताई नाराजगी
डॉ. संजय निषाद ने बिजनौर, मुरादाबाद, जौनपुर, मेरठ, गोंडा और मुजफ्फरनगर में कथित उत्पीड़न और हिंसा की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार से कानून-व्यवस्था के सवाल पर गंभीरता दिखाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर निषाद समाज के लोगों के साथ अन्याय और उत्पीड़न हुआ है।
उन्होंने कहा कि समाज के लोगों के साथ अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के पास सबसे बड़ी ताकत उसका वोट है। यदि किसी समाज के साथ अन्याय होता है और उसकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती है तो वह चुनाव में अपना जवाब दे सकता है। उन्होंने मुरादाबाद और मेरठ की घटनाओं का जिक्र करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की तथा आरोप लगाया कि कुछ मामलों में उन्हें और उनके कार्यकर्ताओं को भी रोकने की कार्रवाई की गई थी।
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि सामाजिक विवादों और उत्पीड़न के मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की छूट नहीं मिलनी चाहिए और पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने अपने समर्थकों से समाज के अधिकारों के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।
पार्टी में टूट की आशंका, नेताओं को दी खुली छूट
अपने संबोधन में डॉ. संजय निषाद ने पार्टी के भीतर चल रही कथित खींचतान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग निषाद पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। अपने बेटे प्रवीण निषाद के चुनावी पराजय और दूसरे बेटे श्रवण निषाद को चौरी-चौरा क्षेत्र में राजनीतिक चुनौती दिए जाने की आशंका का जिक्र करते हुए उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत-हार का फैसला जनता करती है, लेकिन राजनीतिक संघर्ष का सामना मजबूती से किया जाएगा। पार्टी के राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे जा सकते हैं। आने वाले दिनों में राजनीतिक लड़ाई और तेज हो सकती है तथा पार्टी को कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने हैं।
दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम से दिए गए इस संबोधन में डॉ. संजय निषाद ने आरक्षण, सामाजिक सम्मान, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक भागीदारी को एक साथ जोड़कर अपनी भावी रणनीति का संकेत दिया। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि भाजपा की ओर से आरक्षण के मुद्दे पर क्या रुख सामने आता है और निषाद पार्टी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर क्या निर्णय लेती है। वही पहुंचे 190 विधानसभा लम्भुआ क्षेत्र के सेवार्थम फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष-संस्थापक डॉ आशीष तिवारी निषाद पार्टी के नेता।




