प्रशासन से 30 अक्टूबर तक मांगा जवाब
घर सुलतानपुर फाउंडेशन की जनहित याचिका पर सुनवाई, डीजे संचालकों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
जिलाधिकारी और एसपी ने पूजा समितियों व डीजे संचालकों को दी हिदायत, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश
डीजे की तेज आवाज से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। सुलतानपुर में डीजे के तेज शोर पर नियंत्रण की मांग को लेकर घर सुलतानपुर फाउंडेशन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार और प्रशासन से जवाब तलब किया है। याचिका में प्रमुख सचिव गृह, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक समेत संबंधित विभागों और अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका संख्या डब्ल्यूपीआईएल-965/2026 पर छह अक्टूबर को पहली सुनवाई हुई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक तिवारी और उत्कर्ष मिश्रा ने पक्ष रखा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, न्यायालय ने संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए 30 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में अपर मुख्य सचिव गृह, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, जिलाधिकारी सुलतानपुर, पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर पालिका परिषद सुलतानपुर और जिला मेला समिति के अध्यक्ष को भी शामिल किया गया है।
डीजे के शोर पर नियंत्रण की मांग घर सुलतानपुर फाउंडेशन ने जनहित याचिका के माध्यम से डीजे की तेज आवाज पर नियंत्रण और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग उठाई है। याचिका पर न्यायालय की सख्ती के बाद डीजे संचालन से जुड़े नियमों के अनुपालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, मामले में न्यायालय के अंतिम निर्णय और विस्तृत आदेश की पुष्टि होने के बाद ही निर्देशों की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
प्रशासन ने भी दी सख्त चेतावनी
इधर, सुलतानपुर में दुर्गापूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों के मद्देनजर जिला प्रशासन ने भी डीजे की तेज आवाज को लेकर सख्ती दिखाई है।
जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह और पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने पूजा समितियों और डीजे संचालकों के साथ बैठक कर निर्धारित मानकों तथा शासनादेशों का पालन करने की हिदायत दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों के विरुद्ध डीजे बजाने और निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से पहले ही करीब डेढ़ दर्जन डीजे संचालकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका और प्रशासन की सख्ती से डीजे संचालकों पर नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ सकता है।




