दूबेपुर ब्लॉक के त्रिलोकपुर में खर्च को लेकर उठे सवाल
मौके पर सत्यापन की मांग जिलाधिकारी से भुगतान के अभिलेखों और मरम्मत कार्य की जांच कराने की मांग
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/Etv News 24/संवाददाता वागीश
दूबेपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर में सोलर लाइटों की मरम्मत के नाम पर 51,450 रुपये खर्च किए जाने का मामला सवालों के घेरे में है। उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, ग्राम पंचायत में पांच सोलर लाइटों की मरम्मत के लिए यह भुगतान दर्शाया गया है। इस रकम को लेकर मरम्मत कार्य की वास्तविक स्थिति, खर्च के औचित्य और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की जांच की मांग उठ रही है। स्थानीय स्तर पर लाइटें दिखाई नहीं देने की शिकायत के मद्देनजर मामले का स्थलीय सत्यापन कराए जाने की जरूरत बताई जा रही है।
प्रति लाइट औसतन 10,290 रुपये का खर्च
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, पांच सोलर लाइटों की मरम्मत पर कुल 51,450 रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इस हिसाब से प्रति लाइट औसतन 10,290 रुपये का खर्च आता है। इतनी राशि खर्च होने के बाद यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मरम्मत के दौरान कौन-कौन से उपकरण बदले गए और कार्य की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई।

क्या लाइटों की बैटरी, सोलर पैनल, एलईडी या अन्य तकनीकी उपकरणों की मरम्मत अथवा बदलाव कराया गया था? क्या इसके लिए बिल, वाउचर और तकनीकी सत्यापन रिपोर्ट तैयार की गई? इन बिंदुओं की जांच से ही खर्च की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
गांव में लाइटों की स्थिति का सत्यापन जरूरी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल मरम्मत कराई गई पांचों सोलर लाइटों की मौजूदा स्थिति को लेकर है। यदि मरम्मत के नाम पर भुगतान किया गया है, तो संबंधित लाइटों का स्थान, उनकी वर्तमान स्थिति और कराए गए कार्य का विवरण अभिलेखों से मेल खाना चाहिए। इसके लिए ग्राम पंचायत में स्थलीय निरीक्षण कराना जरूरी है।

ग्राम पंचायत से जुड़े कार्यों और भुगतान प्रक्रिया में प्रधान पति ओमप्रकाश की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित भुगतान रिकॉर्ड, कार्यादेश, बिल-वाउचर और सत्यापन रिपोर्ट की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
प्रकरण में जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह से 51,450 रुपये के भुगतान की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि भुगतान कब और किस मद से किया गया, धनराशि किस व्यक्ति या फर्म को दी गई तथा पांचों सोलर लाइटों की मरम्मत वास्तव में कराई गई या नहीं।
इसके साथ ही दूबेपुर विकास खंड के अधिकारियों और पंचायती राज विभाग को संबंधित अभिलेखों का परीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि जांच में भुगतान और मौके पर कराए गए कार्य के बीच अंतर मिलता है, तो जिम्मेदारी निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च होने वाली सरकारी धनराशि का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचना जरूरी है। त्रिलोकपुर में सोलर लाइटों की मरम्मत के नाम पर दर्शाए गए खर्च का पूरा विवरण और मौके की स्थिति सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल ग्रामीणों की सुविधा से जुड़े इस मामले में जांच और पारदर्शिता की मांग उठ रही है।




