CERC ने दो टेंडरों के टैरिफ पर लगाई मुहर, 3.64 से 3.69 रुपये प्रति यूनिट तक होगी दर
25 साल तक मिल सकती है हरित ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य पूरा करने में भी मिलेगी मदद
लखनऊ उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
लखनऊ/नई दिल्ली/ उत्तर प्रदेश में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को दो टेंडरों के माध्यम से कुल 1200 मेगावाट पवन ऊर्जा मिलने का रास्ता साफ हुआ है। केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी) ने एसजेवीएन और सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआइ) से संबंधित परियोजनाओं की प्रतिस्पर्धी बिजली खरीद दरों को मंजूरी दी है। इन टेंडरों में बिजली की दर 3.64 से 3.69 रुपये प्रति यूनिट के बीच है।
एसजेवीएन से 600 मेगावाट खरीदने की तैयारी
एसजेवीएन विंड-3 टेंडर के तहत 600 मेगावाट पवन ऊर्जा के लिए 3.64 से 3.65 रुपये प्रति यूनिट की दर स्वीकृत की गई है। यूपीपीसीएल ने पूरी 600 मेगावाट क्षमता खरीदने के लिए सैद्धांतिक सहमति दी है। हालांकि, बिजली खरीद समझौते (पीपीए) और बिजली बिक्री समझौते (पीएसए) की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। संबंधित समझौतों को आयोग में जमा करने के बाद ही खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
एसईसीआइ के टेंडर में सात कंपनियों को मिला काम
एसईसीआइ के विंड ट्रांच-XIX के तहत भी उत्तर प्रदेश को 600 मेगावाट पवन ऊर्जा मिलेगी। इसके लिए 3.67 से 3.69 रुपये प्रति यूनिट की दर मंजूर की गई है।एसईसीआइ ने 30 मार्च 2026 को यूपीपीसीएल के साथ 600 मेगावाट का पीएसए किया था। इस टेंडर की शेष 600 मेगावाट बिजली के लिए ओडिशा की GRIDCO के साथ 24 मार्च 2026 को समझौता हुआ था।
इस परियोजना के तहत केपी एनर्जी को 100 मेगावाट, गनेको थ्री एनर्जी को 180 मेगावाट, वारी फॉरएवर एनर्जीज को 300 मेगावाट, ओपेरा एनर्जी को 50 मेगावाट, पूर्वाह ग्रीन पावर को 250 मेगावाट, वेना एनर्जी ऑरा को 124 मेगावाट और रेफेक्स होल्डिंग को 196 मेगावाट क्षमता आवंटित की गई है।
बिजली व्यवस्था और पर्यावरण को मिलेगा लाभ
पवन ऊर्जा की खरीद से उत्तर प्रदेश को पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। दीर्घकालीन समझौतों के तहत ऐसी ऊर्जा की उपलब्धता बिजली आपूर्ति की योजना बनाने में सहायक होगी। हालांकि, गर्मियों में बिजली कटौती कितनी कम होगी, यह मांग, उत्पादन, बिजली वितरण और परियोजनाओं से वास्तविक आपूर्ति जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।




