डेहरी ऑन सोन (रोहतास)Etv News 24
यह शरीर मिट्टी से बना है और एक दिन मिट्टी में मिल ही जाएगा, लेकिन आत्मा अमर है। आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए भजन-कीर्तन ही सर्वोत्तम माध्यम है। उक्त बातें शिवगंज कुटिया मंदिर के महंत मनोहर बाबा ने कही। वे शिवगंज निवासी दिनेश यादव के पिता, पूर्व वार्ड पार्षद सह राजद नेता स्वर्गीय जागरूप सिंह के स्वर्गवास के उपरांत आयोजित श्रद्धांजलि सभा, भजन-कीर्तन एवं भंडारा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।मनोहर बाबा ने कहा कि शरीर का खुराक भोजन है, जबकि आत्मा का खुराक भजन-कीर्तन। मृत्यु के बाद लोग भंडारे में पूड़ी-बुंदिया एवं अन्य पकवान समाज, परिवार और मित्रों के लिए करते हैं, लेकिन दिवंगत आत्मा की वास्तविक तृप्ति भजन-कीर्तन से ही होती है। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म आत्मा को शांति प्रदान करने का सबसे प्रभावी साधन हरि-भजन है।इस अवसर पर उन्होंने“बड़ा रे जतनवा से पइलअ मानुष तनवा, करीलअ हरि के भजनवा,भंवरवा के तोहरा संगे जाई”जैसे भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे श्रोता भावविभोर हो उठे।कार्यक्रम में स्थानीय विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह ने स्वर्गीय जागरूप सिंह के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उनकी स्वयं भी भजन-कीर्तन में गहरी आस्था है। विधायक ने कहा कि सूक्ष्म आत्मा की खुराक भजन-कीर्तन है और मृत्यु के उपरांत आयोजित भंडारे में भजन-कीर्तन का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है।भजन-कीर्तन में गायक सुदर्शन यादव, अवधेश चौधरी, राम प्रसाद चौधरी ने भावपूर्ण गायन प्रस्तुत किया। ढोलक वाद्य में नरेश चौधरी, ललन बड़ा बाबू, धन जी, मामा वासुदेव सिंह, जबकि बेंजू वादन में सुनील चौधरी, कइल मिस्त्री, गंगा, नन्हकू, राम, अमित कुमार पंचासी, राम नारायण, पोरस सिंह, बालदेव पासवान, नंदू चौधरी, धन जी पासवान सहित अन्य कलाकारों ने संगत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आगत अतिथियों को उनके पुत्र गणेश सिंह रमेश सिंह ने अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। भजन-कीर्तन के माध्यम से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई और अंत में भंडारे का आयोजन किया गया।



