प्रियांशु कुमार समस्तीपुर बिहार/Etv News 24
डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में अनुसंधान परिषद की बैठक के अंतिम दिन मक्का, दलहन, तिलहन, सब्जियां , फूल एवं अन्य विषयों से संबंधित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। कुलपति डॉ पी एस पांडेय ने अनुसंधान परिषद के समापन समारोह में बोलते हुए कहा कि विश्वविद्यालय देश को 2047 तक विकसित बनाने में अपना अहम योगदान देना चाहता है । यहां के वैज्ञानिक समर्पित भाव से किसानों के कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों तक लगातार अनुसंधान परिषद की बैठक सुबह दस बजे से रात के नौ -दस बजे तक चली है। यह इस बात का प्रमाण है । उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि सिर्फ खानापूर्ति के लिए प्रभेद या तकनीक रिलीज कर दिया जाये इसलिए विश्वविद्यालय से प्रभेद या तकनीक जारी करने से पहले कठोर समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों की स्थानीय और व्यापक समस्याओं को ध्यान में रखकर अनुसंधान कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने तीन पालिसी पेपर जारी किया है जो ठोस अनुसंधान एवं डाटाओं पर आधारित है। इस पालिसी पेपर के आधार पर सरकार को निर्णय लेने में सहुलियत होगी और किसानों को भी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को अब व्यवसाय प्रबंधन एवं मार्केटिंग की ट्रेनिंग देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सब्जियों, फलों एवं अन्य फसलों के प्रोसेसिंग को लेकर भी किसानों को ट्रेनिंग दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कृषि एक व्यवसाय का रूप ले सकता है इसके लिए किसानों को अभी से प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को समझना होगा कि वे दुनिया भर में प्रतिभाशाली है और उन्हें सबसे बेहतर करना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का लैब उपलब्ध करवाया है और यदि कहीं कोई कमी है तो उसको प्राथमिकता के आधार पर तुरंत दूर किया जायेगा। बाह्य विशेषज्ञ के रूप में बोलते हुए शेर ए कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय जम्मू एवं श्रीनगर के पूर्व कुलपति डॉ जे पी शर्मा ने कहा कि वे एक्सपर्ट के रूप में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में जाते रहते हैं लेकिन इस विश्वविद्यालय में अनुसंधान की जो प्रगति है उसको देखकर दावे के साथ कह सकते हैं कि आने वाले कुछ वर्षों के अंदर विश्वविद्यालय के अनुसंधान पूरी दुनिया को नई राह दिखायेगा। उन्होंने कहा कि कई अनुसंधान परियोजनाओं से जो जानकारी प्राप्त हो रही है वो क्रांतिकारी है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे अनुसंधान की पूरी जानकारी तब तक साझा न करें जबतक उसका पूरा निष्कर्ष न आ जाए। नहीं तो दुनिया भर में लोग इसकी कापी कर सकते हैं और इससे भारत को और विश्वविद्यालय को नुक़सान होगा। कार्यक्रम के दौरान निदेशक अनुसंधान डॉ ए के सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय कृषि में डिजिटल एग्रीकल्चर समेत विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि चल रहे अनुसंधान के निष्कर्ष कुछ वर्षों में आयेंगे और कृषि को नई दिशा देंगे। सह निदेशक अनुसंधान डॉ संतोष ठाकुर ने कार्यक्रम के दौरान धन्यवाद ज्ञापन किया जबकि संचालन डा मुकेश कुमार एवं अन्य वैज्ञानिकों ने किया । कार्यक्रम के दौरान निदेशक प्रसार शिक्षा डा रत्नेश झा, निदेशक गन्ना अनुसंधान डॉ देवेन्द्र सिंह, डॉ सी के झा। डॉ महेश कुमार, डॉ शिवपूजन सिंह, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।



