प्रियांशु कुमार समस्तीपुर बिहार/Etv News 24
नई शिक्षा नीति के जरिए शिक्षा को निजीकरण करने की हो रही है कोशिश!
केंद्र सरकार गरीब,किसान,मजदूर एवं वंचित के बच्चों को शिक्षा से दूर करने की कर रही है साजिश :आइसी घोष।
समस्तीपुर (बिभूतिपुर):प्रखंड स्थित एक शिक्षण संस्थान में भारत का छात्र फेडरेशन एसएफआई के बैनर तले शिक्षा छात्र और संविधान के विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।मुख्य वक्ता जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष आईसी घोष के आगमन होते ही इंकलाब जिंदाबाद,एसएफआई जिंदाबाद,पढ़ाई लड़ाई तेज करो,स्वाधीनता जनवाद समाजवाद जिंदाबाद,कॉमरेड आईसी को लाल सलाम आदि नारों के साथ सभी कार्यकर्ता सेमिनार स्थल तक पहुंचे।उसके बाद मुख्य वक्ता आईसी घोष,राज्य सचिव देवदत्त वर्मा,राज्य अध्यक्ष कांति यादव एवं जिला मंत्री छोटू भारद्वाज को माला एवं चादर देकर सम्मानित किया गया।तत्पश्चात सेमिनार का विधिवत आयोजन प्रारंभ हुआ।जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष नीलकमल ने की। इस सेमिनार को राज्य सचिव देवदत्त वर्मा,राज्य अध्यक्ष कांति यादव,जिला मंत्री छोटू कुमार भारद्वाज,पूर्व जिला मंत्री संजय कुमार आदि ने संबोधित किया। वहीं सेमिनार के मुख्य वक्ता जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एसएफआई के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव आईसी घोष ने कहा कि एसएफआई का समस्तीपुर जिला में इतिहास रहा है।शहीद लाल बहादुर राय ने समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर के अंदर अपनी शहादत दिया है।इसीलिए इस जिला के अंदर एसएफआई का झंडा हमेशा ऊंचा रहा है।जब हम बात करते हैं कि शिक्षा और संविधान की तो हम मानते हैं कि देश में अंग्रेजों के खिलाफ जब लड़ाई लड़ी गई थी तो कई देश के कई लोग शहीद हुए थे।उनका एक सपना था जो देश के जनता होंगे,किसान होंगे,मजदूर होंगे, वंचित होंगे उनको पढ़ने लिखने का अधिकार होगा।उनको समान अधिकार मिलेगा।भगत सिंह 23 साल की उम्र में अपनी कुर्बानी दी। उनका यह कहना था कि यह लड़ाई अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ना सही मायने में आजादी का मतलब नहीं होगा।जब देश के अंदर करोड़ोंछात्र,युवा,किसान,मजदूर एवं वंचित अपने पैर पर खुद खड़े होंगे तभी सही मायने में हमारा देश आजाद होगा। लेकिन आज देश के अंदर क्या हो रहा है हम और आप सभी देख रहे हैं।आज विकसित भारत की बात हो रही है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की बात हो रही है।लेकिनछात्र-छात्राओं को शिक्षण संस्थान में मूलभूत सुविधा तक नसीब नहीं होता है।आज शिक्षा को निजीकरण किया जा रहा है।इस क्षेत्र में इकलौता डिग्री कॉलेज डीबीकेएन है, जहां छात्राओं को निशुल्क शिक्षा मिल रही है;तो वह एसएफआई के आंदोलन कारण ही हो रहा है।लेकिन अधिकांश कॉलेजों में किसान,मजदूर,गरीब,पिछड़ा एवं वंचितों के बच्चों को महंगी शिक्षा मिल रही है।आज शिक्षा के क्षेत्र में भी जाति धर्म को बढ़ावा दिया जा रहा है।बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने हम दलित महा दलित पिछड़े अति पिछड़े को जो शिक्षा का अधिकार दिया है।उसे कुचलने की कोशिश की जा रही है।केंद्र सरकार चाहती है कि पिछड़ा,किसान,मजदूर एवं वंचितों के बच्चे को पढ़ने लिखने से रोकी जा सके।क्योंकि वे समझते हैं कि जब यह समाज के सबसे निचले तबके,वंचित तबके के लोग पढ़ेंगे तो वह अपने अधिकार के लिए लड़ेंगे।वहीं इस संविधान के लिए हमलोग को मजबूत लड़ाई लड़ने की जरूरत है।इसलिए हम छात्रों को पढ़ाई लड़ाई साथ-साथ करने की जरूरत है।इसलिए एसएफआई जुड़े रहकर हमें संघर्ष करने की जरूरत है।अंत में साथी आईसी घोष डीबीकेएन कॉलेज के कैंपस का भ्रमण किया।इस दौरान कॉलेज के शिक्षक एवं कर्मचारियों से औपचारिक मुलाकात कर कैंपस में शैक्षणिक गतिविधि का हाल-चाल जाना।मौके पर केशव झा,प्रिंस कुमार,सोनू कुमार, श्याम बाबू,दिवाकरकुमार,अंजली कुमारी रोहित कुमारी रवीना कुमारी रुखसाना खातून स्नेहा कुमारी नेहा कुमारी काजल कुमारी प्रीति कुमारी सहित सैकड़ो छात्र-छात्राएं शामिल थे।



