एनएच और एसएच की सड़कों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा,होती है लोगों को परेशानी अतिक्रमण हटाने में नगर प्रशासन की कोई दिलचस्पी नहीं
कोचस/रोहतास/रमेश कुमार पांडेय/ Etv News 24
नगर पंचायत क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 319 से लेकर सासाराम-चौसा स्टेट हाइवे की सड़कों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा हो गया है।कहीं, निजी जमीन के अलावा सरकारी भूमि पर आगे बढ़ कर पक्का मकान बनाया गया है,तो कहीं सड़क पर ही बालू-गिट्टी की दुकान,गैराज पंचर की दुकान,फुटपाथ की दुकान और ठेला लगा कर सड़क का अतिक्रमण किया गया है।महात्मा गांधी चौक के आसपास,बस पड़ाव और मुख्य बाजार में अतिक्रमणकारियों के कब्जे से सड़कें संकरी हो गयी है।नगर प्रशासन की लापरवाही के कारण बाजार की मुख्य सड़क में फुटपाथ दुकानदारों और ठेले पर कारोबार करने वालों ने आधी सड़क पर कब्जा जमा रखा है।कंक्रीट के दुकानदार भी दुकान का सामान आधी सड़क तक फैला देते हैं.वहीं, शहर में पार्किंग स्थल नहीं होने से आसपास के क्षेत्रों से खरीदारी के लिए आने वाले ग्राहक भी अपनी वाहन खड़े कर दूकानों में चले जाते हैं।इससे बाजार की सड़कों पर चलना भी मुश्किल हो जाता है.चाहे एनएच 319 हो या फिर स्टेट हाइवे 17 का पथ,डाक बंगला मार्केट, अस्पताल रोड हो या सासाराम रोड इन सभी की हालत एक जैसी हो गयी है।मुख्य सड़क में ज्यादातर जगहों पर फुटपाथ दुकानदार सड़क किनारे ही अपनी दुकानें सजा लेते हैं।इस दौरान इन सड़कों पर केवल बाइक से या फिर पैदल ही चला जा सकता है।नाले का निर्माण सड़क से ऊंचा:शहर में सड़क किनारे बने नाले की ऊंचाई सड़क से अधिक कर दी गई है।इससे भी सड़कें ज्यादा संकीर्ण हो गयी है।उन नालों पर कहीं फल व सब्जियों की दुकानें सजी हुई है, तो कहीं फुटपाथी दुकानदारों का साम्राज्य स्थापित है।इसके कारण आमलोगों का पैदल चलना मुश्किल हो गया है।अतिक्रमण और सड़क जाम से व्यापारी त्रस्त: स्थानीय लोगों की मानें तो,सासाराम,मोहनियां,बिक्रमगंज और बक्सर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कोचस नगर पंचायत एक बड़े व्यवसायिक केन्द्र के रूप में उभरी है.यह बाजार सब्जी से लेकर कपड़े,आभूषण,इलेक्ट्रॉनिक व कीमती सामानों की बिक्री का हब बन गयी है।इसमें अधिकांश मंडियां एनएच किनारे व सरकारी भूमि को अतिक्रमित कर लगायी गयी है।इससे प्रतिदिन व्यापारी,राहगीर व स्थानीय लोग जाम में घंटों फंसे रहते हैं।पैदल सड़क और बाजार में चलना भी मुश्किल:बताया जाता है कि दशहरा,दीपावली व छठ जैसे पर्वों में यहां मेले सा दृश्य देखने को मिलता है।ऐसे में पैदल सड़कों व बाजारों में चलना मुश्किल हो जाता है।चूंकि व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का एक बड़ा केंद्र होने के कारण दिनारा,परसथुआं,करगहर,बड़हरी,राजपुर,धनसोई समेत दर्जनों छोटे बाजारों के व्यापारी थोक मूल्य पर फल,सब्जी,कपड़े,आभूषण,इलेक्ट्रॉनिक आदि सामानों की खरीदारी के लिए यहां प्रतिदिन आते हैं,जो अपनी गाड़ियों को सड़क किनारे खड़ी कर कारोबार करने चले जाते हैं।
कार्रवाई के नाम पर होती है खानापूर्ति:लोगों का कहना है कि अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई करने में नगर प्रशासन द्वारा कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जाती है.यहां कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है।कार्रवाई के दौरान अधिकारियों का दल चंद समय में सड़क किनारे खड़े ठेले-खोमचे व ई-रिक्शा वालों को हटा कर इस अभियान की इतिश्री कर वापस चला जाता है।इसके कुछ घंटे बाद ही अतिक्रमणकारी स्थिति को भांप कर फिर सड़कों पर काबिज हो जाते हैं।
गलत दिशा में ओवरब्रिज निर्माण से हो रही परेशानी:लोगों का कहना है कि आरा-मोहनियां राष्ट्रीय राजमार्ग 319 पर फोरलेन निर्माण के दौरान स्थानीय बाजार में इसी सड़क पर ओवरब्रिज का निर्माण होना था। ताकि निर्बाध गति से अन्य प्रदेशों से आने-जाने वाले भारी वाहनों का संचार हो सके.लेकिन,नगर प्रशासन की लापरवाही व पीडब्ल्यूडी की मनमानी की वजह से इसे एनएच 319 से हटा कर स्टेट हाइवे 17 पर स्थानांतरित कर दिया गया.जिससे शहर में जाम की समस्या नासूर बन गयी है।



