बढते तापमान के बीच हीट स्ट्रोक हो सकता है जानलेवा,बन्द गाडी में बच्चों व जानवरों को न छोड़ें
कोचस/रोहतास/रमेश कुमार पांडेय/Etv News 24
जून के महीने में जैसे-जैसे तापमान बढ रहा है,वैसे मनुष्य व पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य को लेकर चिन्ता बढ़ने लगी है.ऐसी स्थिति में तेज गर्मी व हीट स्ट्रोक से बचाव के लिये सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ तुषार कुमार ने एक एडवाइजरी जारी कर लोगों को आगाह किया है.इसके अनुसार भीषण गर्मी में दोपहर के 3 घण्टे स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हो सकते हैं.उन्होंने इन 3 घण्टों के खुली घूप से लोगों को बचने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि इस दौरान जानवरों व बच्चों को बंद गाडी में नहीं छोडा जाए,अन्यथा यह जानलेवा हो सकता है.उन्होंने दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच खुली धूप में न निकलने की हिदायत देते हुए कहा कि बहुत जरूरी कार्य के दौरान घर से बाहर निकलने के पहले करीब एक लीटर ठंडे पानी का सेवन करें और इसके साथ यह सुनिश्चित कर लें कि शरीर पूरी तरह सूती कपड़े से ढका हुआ है.सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ तुषार कुमार ने बताया कि भीषण गर्मी में लापरवाही जानलेवा हो सकती है.सरकारी निर्देशों के अनुपालन से हीट स्ट्रोक से बचा जा सकता है. हीट वेव की स्थिति शरीर के कार्यप्रणाली पर प्रभाव डालती है,इससे हीट स्ट्रोक की स्थिति बन सकती है.उन्होनें बताया कि इसके बचाव के लिये अधिक से अधिक पानी का सेवन करें.अगर आप खुले में कार्य करते हैं तो सिर,चेहरा,हाथ और पैरों को गीले कपडे से ढककर रखें तथा छाते का प्रयोग करें.लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपडे से पोंछे अथवा नहलायें और शीघ्र चिकित्सकों से सम्पर्क करें.यात्रा के दौरान ओआरएस,घर में बने पेय पदार्थ जैसे-लस्सी,चावल का पानी,नीबूं पानी,छाछ आदि का उपयोग करें,जिससे शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सके. हीट स्ट्रोक,हीट रैश,हीट क्रैम्प के लक्षणों जैसे कमजोरी,चक्कर आना,सरदर्द,उबकाई,पसीना आना, बेहोशी आदि की पहचान होने पर तुरन्त चिकित्सकीय सलाह लेने में कोताही नहीं बरते.



