करगहर रोहतास/Etv News 24
स्थानीय शिव मंदिर परिसर में वर्षों से स्थापित महावीर जी की मूर्ति को गुरुवार की रात उखाड़ने को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई । स्थल पर अधिकारियों व ग्रामीणों की भीड़ लग गई । इस बीच एक व्यक्ति ने उक्त स्थल को निजी भूमि बताते हुए मूर्ति उखाड़ने की बात स्वीकार की । दोनों पक्षों को कागजात प्रस्तुत करने के लिए थाना में बुलाया गया । निजी भूमि का दावा करने वाले उक्त व्यक्ति ने बिहार सरकार की 5 डिसमिल भूमि का मालगुजारी रसीद प्रस्तुत किया गया । लेकिन बंदोबस्ती के कागजात की जगह न्यायालय में दायर मुकदमा का कागज दिखाया ।वहीं दूसरी ओर मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष विजय पांडेय ने बताया कि 1911 के सीएस खतियान दिखाया जिसमें महावीर मर्ति , कच्चा मकान में पुस्तकालय, ईमली का पेड़ व अष्टकोणीय कुंआ लिखा हुआ था । 1971 के आर एस सर्वे के दौरान मंदिर न्यास समिति का कोई सदस्य उपस्थित नहीं होने के कारण सर्वे पदाधिकारी ने उक्त मंदिर की भूमि को बिहार सरकार की भूमि घोषित कर दी। उन्होंने बताया कि पुस्तकालय के कमरे में न्यास समिति के पूर्व सचिव त्रिलोकी मिश्रा रहते थे। उनकी मृत्यु के बाद भभुआ स्थित अखलासपुर निवासी उनके दामाद राम विजय तिवारी ने फर्जी कागजात के आधार पर अपनी सास अतरवासो देवी का फर्जी कागजात बनाकर बिहार सरकार की उक्त भूमि जिसका खाता नंबर 117 खेसरा नंबर 869 रखवा 05 डिसमिल भूमि की बंदोबस्ती करा लिया । उन्होंने बताया कि कच्चा पुस्तकालय जीर्ण-शीर्ण होकर काफी दिनों पूर्व ध्वस्त हो गया । जिसमें स्थापित महावीर जी की मूर्ति मिट्टी से दब गई । शिव मंदिर जीर्णोद्धार के समय मीट्टी हटाकर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई । जिसे उक्त व्यक्ति द्वारा उखाड़ दिया गया ।अंचलाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि बिहार सरकार की उक्त भूमि की बंदोबस्ती के कागजात प्रस्तुत नहीं किए जाने तथा मंदिर के पुराने कागजातों के आलोक में पुनः महावीर जी की मूर्ति स्थापित कर तनाव पर विराम लगा दिया गया । दोनों पक्षों को यह आदेश दिया गया कि न्यायालय का फैसला आने तक उक्त भूमि की संरचना मे कोई छेड़छाड़ नहीं करेंगे । इस अवसर पर थानाध्यक्ष विजय कुमार ,मंदिर न्यास समिति के सदस्य भृगु मुनि पांडेय, मुन्ना पांडे सहित दर्जनों ग्रामीण उपस्थित थे ।



