अधिकारियों की तय की जवाबदेही 90 दिन में कार्रवाई पूरी करने पर जोर
प्रधान और लेखपाल की भूमिका भी अहम;अतिक्रमण हटाने में पुलिस का सहयोग जरूरी PIL 2923/2025 में अहम निर्देश
तालाब, खेल मैदान और सार्वजनिक भूमि को कब्जामुक्त कराने की प्रक्रिया में लापरवाही पर हो सकती है कार्रवाई
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
ग्राम सभा की जमीन, तालाब, खेल मैदान और अन्य सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जनहित याचिका (PIL) संख्या 2923/2025 से संबंधित आदेश के संदर्भ में राजस्व प्रशासन की जिम्मेदारी, अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर दिया गया है। सार्वजनिक भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए केवल बेदखली का आदेश पारित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उस पर प्रभावी कार्रवाई कराना भी जरूरी है।
अवैध कब्जे की सूचना देना भी जिम्मेदारी
ग्राम सभा की जमीन पर अवैध कब्जे की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने या संबंधित अधिकारियों तक सूचना नहीं पहुंचाने के मामलों में ग्राम प्रधान और लेखपाल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। राजस्व कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति को संज्ञान में लाएं और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं। तालाब, खेल मैदान तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीन को सुरक्षित रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।
धारा 67 के मामलों में समयसीमा का पालन जरूरी
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत ग्राम सभा की भूमि पर अनधिकृत कब्जे के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। संबंधित मामलों के निस्तारण में तहसीलदार और तहसीलदार न्यायिक की भूमिका अहम होती है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, ऐसे मामलों में 90 दिन की समयसीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने पर जोर दिया गया है। हालांकि, प्रत्येक मामले में लागू समयसीमा और प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित न्यायिक आदेश के मूल पाठ से की जानी चाहिए।
कब्जा हटाने में पुलिस का सहयोग, लापरवाही पर कार्रवाई
अतिक्रमण हटाने के दौरान आवश्यकता पड़ने पर पुलिस से सहयोग लेने और राजस्व प्रशासन के स्तर पर कार्रवाई को प्रभावी ढंग से पूरा कराने पर भी जोर है।
सार्वजनिक भूमि से कब्जा नहीं हटने या कार्रवाई में लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है। इस संबंध में लेखपाल, कानूनगो और तहसील स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है।
हालांकि, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 मुख्य रूप से आपराधिक न्यासभंग से संबंधित है। इसलिए सरकारी भूमि से कब्जा नहीं हटाने मात्र के आधार पर इस धारा में कार्रवाई स्वतः लागू होने का दावा नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित तथ्यों, आवश्यक कानूनी तत्वों और न्यायिक आदेश के सटीक निर्देशों की पुष्टि जरूरी है।
हाईकोर्ट के आदेश का मूल उद्देश्य सार्वजनिक संपत्ति को अतिक्रमण से बचाने, राजस्व प्रक्रिया को प्रभावी बनाने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के रूप में देखा जा रहा है। इससे ग्राम सभा की जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़े मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।




