रोहतास उपेक्षित क्यों एलपीजी प्लांट के बिना गैस संकट और बेरोजगारी की दोहरी मार
सासाराम रोहतास /Etv News 24/ब्यूरो रिपोर्ट
रोहतास जिले की तस्वीर एक ऐसे क्षेत्र की बन गई है जहां मूलभूत सुविधा होने के बावजूद व्यवस्था की कमी साफ झलकती है। पूरे बिहार में एलपीजी गैस के बॉटलिंग प्लांट स्थापित हैं, लेकिन रोहतास आज भी इससे वंचित है। नतीजा यह है कि यहां के लोगों को गैस के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है और समय पर सिलेंडर मिलना भी एक चुनौती बन गया है।राज्य में Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited के कई प्लांट सुचारू रूप से चल रहे हैं। इन प्लांटों से दूसरे राज्यों तक गैस की आपूर्ति हो रही है, लेकिन विडंबना यह है कि रोहतास जिले के लोग आज भी इंतजार में हैं।ग्रामीण इलाकों में हालात ऐसे हैं कि गैस बुकिंग के बाद भी दिनों तक डीपी नंबर नहीं आता। रसोई ठप पड़ जाती है, महिलाएं परेशान होती हैं और लोग मजबूरी में पुराने साधनों का सहारा लेने को विवश हो जाते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर रोहतास में एक एलपीजी बॉटलिंग प्लांट स्थापित हो जाए, तो यह सिर्फ एक सुविधा नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बदलाव की शुरुआत होगी। इससे कैमूर, औरंगाबाद, चंदौली, पलामू और गढ़वा जैसे आसपास के जिलों को भी सीधा लाभ मिलेगा।सबसे बड़ा सवाल रोजगार को लेकर है। एक प्लांट खुलने से करीब 500 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिलने की संभावना है। इसमें अधिकारी, कर्मचारी, हेल्पर और ड्राइवर तक शामिल होंगे। ऐसे में यह सिर्फ गैस की समस्या का समाधान नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य को संवारने का भी एक बड़ा मौका है।अब सवाल यह उठता है कि जब हर जिले में सुविधा पहुंचाने की बात होती है, तो रोहतास को अब तक क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है। क्या यहां के लोग इस सुविधा के हकदार नहीं हैं या फिर यह जिला सिर्फ वादों तक ही सीमित रह जाएगा।स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार, सांसद और विधायक से अपील की है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए रोहतास में एलपीजी बॉटलिंग प्लांट स्थापित कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि जिले को भी उसका हक मिल सके।



