कोचस/रोहतास/रमेश कुमार पांडेय/Etv News 24
25 मई से रोहिणी नक्षत्र के आगमन के साथ किसान खरीफ फसल के लिए बिचड़े डालने कार्य शुरू कर देते हैं.इसके साथ ही बिचड़े डालने व उसके पटवन के लिए बराज से विभिन्न राजवाहा में पानी छोड़ दिया जाता है.लेकिन,इस बार नहरों की साफ-सफाई नहीं होने से खेतों तक पानी पहुंचाने में किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी.इससे हजारों एकड़ खरीफ फसलों की सिंचाई प्रभावित हो सकती है।करगहर राजवाहा से जुड़े राजेन्द्र तिवारी,संतोष तिवारी,कमलाकांत पाण्डेय,सुरेश सिंह, कामेश्वर यादव,रामनारायण पासवान आदि किसानों का कहना है कि सरकार एक तरफ जहां ग्रामीण इलाकों में फसलों की सिंचाई के लिए अंतिम छोर तक पानी उपलब्ध कराने में जुटी हुई है.वही,दूसरी तरफ सिंचाई विभाग के अधिकारी कागजी घोड़ा दौड़ाने में लगे हुए हैं।किसानों के अनुसार एक दशक पहले सिंचाई विभाग के द्वारा अप्रैल महीने के पहले सप्ताह से मई महीने के दूसरे सप्ताह तक नहरों की साफ-सफाई और तटबंधों के मरम्मती कार्य पूरा कर लिया जाता था।लेकिन,इस बार विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण न तो राजवाहा की साफ-सफाई की गयी,और न ही तटबंधों का मरम्मत कार्य पूरा किया गया.इससे नहरों में उगे अवांछित पौधे,खर-पतवार और कूड़े-कचरे से राजवाहा का अस्तित्व खतरे में है.किसानों ने बताया कि पिछले कई सालों से राजवाहा की साफ-सफाई नहीं की गयी है।लेकिन इसके नाम पर सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारी फर्जी तरीके से राशि की निकासी करते हैं.बताया जाता है कि नहरों की साफ-सफाई पर सिंचाई विभाग प्रतिवर्ष लाखों रुपये खर्च करती है.लेकिन,नहर कूड़े-कचरे और अवांछित पौधों से भरा पड़ा है।



