प्रियांशु कुमार समस्तीपुर बिहार/Etv News 24
समस्तीपुर शहर में साफ-सफाई के दौरान गंदगी दिखने पर सर्वेक्षण रिपोर्ट में नेगेटिव मार्किंग मिलने की जानकारी मिली है। केंद्र सरकार द्वारा कराए जा रहे स्वच्छ सर्वेक्षण का पैटर्न इस वर्ष बदल गया है। इसे लेकर नई गाइडलाइन जारी की गई है। सर्वेक्षण की वेबसाइट पर अपलोड की गई जानकारी और जमीनी हकीकत में फर्क होने पर नेगेटिव मार्किंग होगी।पहले सर्वेक्षण में कुल 9,500 अंक निर्धारित किए गए थे, लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर 12,500 कर दिया गया है। गाइडलाइन के अनुसार, यदि डॉक्यूमेंट और फील्ड सर्वे में 20% से अधिक का फर्क पाया गया तो अंक काटे जाएंगे। स्वच्छ सर्वेक्षण के लक्ष्य प्राप्त करने के लिए नगर परिषद को खाली पड़े भू-भाग, नालों की सफाई, कचरा प्रबंधन, उठाव, जल निकासी आदि पर ध्यान देना होगा।

गली-मोहल्लों में जाम नालियों व मुख्य नालों की उड़ाही करनी होगी। यदि यह काम नहीं किया गया तो स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर को नुकसान हो सकता है। नगर निगम के सामने पॉलीथीन का उपयोग, खुले नाले, जलजमाव और कचरे के शत-प्रतिशत निस्तारण की बड़ी चुनौती है। शहर में लावारिस मवेशियों को हटाना भी जरूरी है।केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय इसी मार्च में स्वच्छ सर्वेक्षण टीम भेज सकता है। स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान वार्ड की स्वच्छता व्यवस्था, नागरिकों की भागीदारी, कचरा प्रबंधन, सेग्रीगेशन तकनीक, जैविक खाद और अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन का टीम द्वारा जायजा लिया जाएगा। इस अभियान के तहत तीन चरणों में नगर में दृश्यमान स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और शिकायत निवारण का सर्वेक्षण होगा।



