जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में 494.46 करोड़ रुपये खर्च होने का मामला, आयकर रिटर्न में महज 78.32 करोड़ का हिसाब
सरकारी धन के दुरुपयोग और धोखाधड़ी के आरोप में आजम खान, जौहर ट्रस्ट व ठेकेदारों पर कार्रवाई
रामपुर उत्तर प्रदेश/ Etv News 24/संवाददाता वागीश
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की जेल से रिहाई को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके खिलाफ एक और कानूनी शिकंजा कस दिया है। ED की शिकायत पर रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ नई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि यह मुकदमा 13 अक्टूबर की रात दर्ज हुआ था। इससे पहले ED की चार सदस्यीय टीम ने रामपुर जिला जेल में बंद आजम खान से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी।
494 करोड़ के निर्माण खर्च और आयकर रिटर्न में बड़ा अंतर
ED की शिकायत के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण पर कुल 494.46 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। वहीं, ट्रस्ट की ओर से वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक दाखिल आयकर रिटर्न में महज 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दर्शाया गया है। इस तरह दोनों आंकड़ों के बीच करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर बताया जा रहा है। ED को आशंका है कि निर्माण कार्यों में खर्च की गई रकम और उसके स्रोतों का पूरा विवरण घोषित आय-व्यय से मेल नहीं खाता। इसी वित्तीय अंतर और धन के स्रोतों की जांच के दायरे में ट्रस्ट तथा यूनिवर्सिटी को रखा गया है।
सरकारी धन के इस्तेमाल का आरोप, कई धाराओं में मुकदमा
ED की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सरकारी पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर विभिन्न सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके हासिल किए गए और उनसे संबंधित धनराशि का उपयोग जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में कराया गया। शिकायत के अनुसार, ठेकेदारों के माध्यम से करीब 55.8 करोड़ रुपये, सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े 23.41 करोड़ रुपये और विधायक निधि से 6.60 करोड़ रुपये के कार्य यूनिवर्सिटी परिसर में कराए गए। इन सभी मदों को मिलाकर करीब 85.81 करोड़ रुपये की धनराशि का उल्लेख किया गया है।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। ED इस नई FIR को वर्ष 2019 में दर्ज अपनी प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) से जोड़कर धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आगे की जांच और कार्रवाई कर सकती है।
रिहाई की राह में फिर कानूनी अड़चन
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से जुड़े दो पैन कार्ड मामले में सजा के खिलाफ दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट अपना फैसला सुरक्षित रख चुका है। ऐसे में उनकी रिहाई को लेकर पहले से ही कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब ED की नई कार्रवाई ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इसके अलावा आजम खान के खिलाफ पहले से दर्ज दो दर्जन से अधिक मामलों का भी कानूनी असर उनकी रिहाई पर पड़ सकता है। फिलहाल वह रामपुर जिला जेल में बंद हैं और ED की जांच जारी है।




