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जमुई में फरोग-ए-उर्दू सेमीनार एवं मुशायरा कार्यक्रम का हुआ भव्य आयोजन


जमुई (ब्यूरो अजीत कुमार) शहर के गांधी पुस्तकालय के सभागार में गुरूवार को फरोग-ए-उर्दू सेमीनार एवं मुशायरा कार्यक्रम का शुभारंग हुआ। कार्यक्रम को एसडीओ लखींद्र पासवान, डीइओ विजय कुमार हिमांशु, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी सह उर्दू कोषांग प्रभारी मो. खिलाफत अंसारी, जमुई बीडीओ पुरूषोत्तम त्रिवेदी एवं विभिन्न प्रखंड के बीडीओ ने दीप प्रज्जवलित कर इसका विधिवत उदघाटन किया। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता वरीय अधिवक्ता डा. मासूम रजा अमरथवी ने की। इस अवसर पर प्रभारी डीएम सह डीडीसी अरूण कुमार ठाकुर ने कहा कि उर्दू पढ़ने-लिखने का शोर मचाने, जलशा-जुलूस निकालने और उर्दू को अपनाने का नारा लगाने के बजाय उर्दू से मोहब्बत किजीए । इस जबान से मोहब्बत करने की जरूरत है। जब मोहब्बत हो जाएगी तो खुद ब खुद लिखने-पढ़ने का शौक पैदा हो जाएगा। वहीं जमुई एस पी डॉo इनामूल हक़ मेगनू ने सेमिनार और मुशायरा के आयोजकों की जम कर तारीफ की। वहीं एडीएम कुमार संजय प्रसाद ने कहा कि उर्दू एक अफाकी जवान है जिसे दुनियां के बहुत सारे मुल्क में बोला जाता है। कोई जवान किसी की मेरास नहीं होती है। वहीं डीइओ विजय कुमार हिमांशु ने कहा कि उर्दू जवान मुल्क हिन्दुस्तान में पैदा हुआ और इसी मुल्क में परवरिश पाई । साथ ही रूहुल जमील, मौलाना मो. मुस्लिम अशरफी, मौलाना मो. फारूक अशरफी के द्वारा उर्दू जवान के बारे में विस्तारपूर्वक अपनी अपनी बात रखी। इस अवसर पर आईसीडीएस अधिकारी कविता कुमारी, खैरा बीडीओ डा. अतुल्य कुमार आर्य, गिद्धौर के प्रभारी बीडीओ भारती कुमारी, सिकंदरा बीडीओ, झाझा बीडीओ, मो. महफूज आलम, मो. असलम, मो. कलाम उद्दीन, शौकत अली, हिबजुल रहमान सहित काफी संख्या में उर्दू शिक्षक-शिक्षिका मौजूद थी। जिसमें
जिला उर्दू नामा जमुई किताब का हुआ विमोचन : कार्यक्रम के दौरान उर्दू कोषांग की ओर से जिला उर्दू नामा जमुई किताब का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर उर्दू कोषांग प्रभारी मो. खिलाफत अंसारी ने बताया कि इस किताब में डीएम धर्मेंद्र कुमार, एसपी डा. इनामुल हक मेंगनु, डीडीसी, एडीएम सहित जिला के विभिन्न पदाधिकारी और शायर, चिकित्सक सहित कई गणमान्य लोगों के विचार को लिखागया है। साथ ही इस किताब में जमुई के विभिन्न दर्शन स्थल सहित विभिन्न पदाधिकारियों का टेलीफोन और मोबाइल नंबर भी दिया गया है। किताब में जमुई रेलवे स्टेशन पर रूकने वाले रेल गाड़ियों का समय-सारणी भी दिया गया है। यह किताब कुल 121 पेज का है।
ये दिल तेरी उल्फत का सदियो से दीवाना है…शायर के कलाम से ने इसका लुफ्त उठाया। फरोग-ए- उर्दू सेमीनार के उपरांत मुशायरा का भी शुरूआत हुआ। मुशायर में विभिन्न प्रदेश के कई जाने-माने शायर ने शिरकत किया। मुशायरा कार्यक्रम का संचालन आसिक आजमी कर रहे थे। वहीं बेगुसराय की निगार आरा ने यह इश्क की बातें है चाहत का फसाना है, जो आज शहर महफिल तुम सब को सुनाना है, ये दिल तेरी उल्फत का सदियों से दीवाना है, अभी फोन उसे कर के यह मुझको बताना है, दुनियां ने तुझे तेरी चाहत में दिया है जो, वह जाने तमन्ना को हर जख्म दिखाना है, गुशलन में बहारों से तुझे मंजर ये दिखान आदि कलाम का खूब वाह-वाही लूटा। वही कार्यक्रम में शायर द्वारा नाते पेश करते हुए कहा कि यूं तो आये थे हिदायत के लिए कितने नवी, तुझ सा आया नहीं जिशान रसूल अरबी, सारी दुनियां की हिदायत के लिए काफी है, तुझ पे इतरा है जो कुरान रसूल अरबी आदि नात पेश किया। वहीं शायर ने मोहब्बत की सुनहरी दास्ता है अहमद, गुल व बुलबुल के गोया राजदान है अहमद, इन्हीं के दम से है उर्दू का यह चुलमन कदर रौशन, सितारो से मजीन आसमान है अहमद आदि कलाम ने लोगों को बैठने पर मजबूर कर दिया। वहीं मुझ से उल्फत है तुम्हारी सकुन छुपाता क्यूं हो, मेरी खुशबू के लिए खाब सजाते क्यूं हो, तुम ने चाहा है मुझे खुद से भी ज्यादा मुझे को, पास में आये मेरी आंख मिलाते क्यूं हो आदि कलाम ने खुब ताली बटोरी। वहीं श्रीपुर के आलम अंजुम, कुल्टी के मेराज अहमद मेराज, आसनसोल के यासीन साकिब, वकी मंजर, कोलकाता की मंजू कुमारी इशरत, कटक के नफीस देसनवी, लखीसराय के राजेंद्र राज, उड़ीसा के समीउल हक शाकिर, रानीगंज के हशमत अली अशमत, अर्चना दिव्या, नसरीन जहां, बरनपुर के शकील अहमद शकील, डा. शाहिन, दिल्ली के नशतर अमरोही, राना जेबा आदि शायर ने भी अपनी-अपनी कलाम से लोगों को खूब वाह-वाही लूटी।

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