प्रियांशु कुमार समस्तीपुर बिहार/Etv News 24
पन्ना, पवई, ग्राम सिमरिया गुलाब सिंह मैदा बाई बाग में पर्यावरण प्रेमी शिक्षक सतानंद पाठक ने पक्षियों को दाना पानी रखते हुए कहा कि….
गौरैया: हमारी बचपन की साथी
गौरैया पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। हमारी अनदेखी और आधुनिक जीवनशैली के कारण यह प्यारा पक्षी धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रहा है।गौरैया भारतीय घरों, आंगनों और खेतों में आमतौर पर देखी जाने वाली एक छोटी चिड़िया है। यह अपने मीठे चहचहाने और फुर्तीली उड़ान के लिए जानी जाती है। हमारे दादा-दादी के समय में यह हर घर की छतों, पेड़ों और खिड़कियों पर खेलती नजर आती थी, लेकिन आज यह दृश्य दुर्लभ होता जा रहा है।गौरैया के संरक्षण के लिए हमें अपने घरों में छोटे घोंसले लगाने चाहिए, ताकि गौरैया को रहने के लिए जगह मिले। पेड़-पौधों को बचाना और अधिक वृक्षारोपण करना जरूरी है।कीटनाशकों के प्रयोग को सीमित करना चाहिए।छतों और बालकनी में दाना-पानी रखना चाहिए, ताकि गौरैया को भोजन मिल सके। गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यदि हमने अभी से इसे बचाने के प्रयास नहीं किए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह सिर्फ किताबों में ही रह जाएगी। हम संकल्प लें कि हम इस नन्ही चिड़िया को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।



