तिलौथू प्रखंड के हुरका गॉव के पूर्व पैक्स अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से की सीबीआई जांच की मांग
तिलौथू रोहतास/ Etv News 24
सासाराम कोऑपरेटिव बैंक में वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। तिलौथू प्रखंड के आदर्श पैक्स, हुरका के पूर्व अध्यक्ष कुमार रवि रंजन उर्फ चुनचुन सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय, आरबीआई, बिहार के राज्यपाल, नाबार्ड तथा बिहार सहकारिता विभाग को साक्ष्यों के साथ शिकायत भेजकर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।शिकायत में चुनचुन सिंह ने बैंक के प्रबंध निदेशक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बैंक में स्टांप खरीद से जुड़े मद में करोड़ों रुपये का कथित गबन हुआ। उनका दावा है कि जब इस मामले की जानकारी बैंक के निदेशक मंडल को हुई तो उन्होंने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद बैंक द्वारा लगभग एक करोड़ रुपये जमा कराए गए। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि अब भी लाखों रुपये का हिसाब बाकी है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैंक प्रबंधन द्वारा ऋण वसूली के दौरान कई मामलों में वास्तविक उधारकर्ता के बजाय तीसरे पक्ष से जबरन एग्रीमेंट कराकर वसूली की जाती है। इसके अलावा रोहतास और कैमूर जिले की कई पैक्स समितियों को मनमाने ढंग से डिफॉल्टर घोषित कर उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।चुनचुन सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि बैंक द्वारा पैक्स समितियों से प्रति क्विंटल 35 रुपये की कथित अवैध वसूली किए जाने के कारण किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। उनका आरोप है कि इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ की भरपाई अंततः किसानों के भुगतान से की जाती है, जिससे सरकारी खरीद व्यवस्था प्रभावित होती है।उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पहले बिहार राज्य खाद्य निगम से संबंधित फोर्टिफाइड चावल आपूर्ति करने वाली एक एजेंसी के विरुद्ध विभागीय विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर उनका बयान भी दर्ज किया गया। उनका दावा है कि जांच के बाद संबंधित एजेंसी को भुगतान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा उन पर बयान वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। गौरतलब है कि यह सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित बैंक प्रबंधन या प्रबंध निदेशक की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।



