पटना बिहार न्यूज डेस्क/Etv News 24
जमीन के दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन में हुई गड़बड़ियों को ठीक करने का अधिकार डीसीएलआर से लेकर अंचल अधिकारियों (सीओ) को दे दिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने डिजिटाइजेशन के दौरान हुई कतिपय त्रुटियों के कारण लॉक की गई 9.65 लाख जमाबंदी को अनलॉक करने के लिए नया निर्देश जारी किया है।*जमाबंदी की वैधता की जांच और उसे लॉक/अनलॉक करने की शक्ति अब सीओ को दे दी गई है।
पहले यह अधिकार डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ताओं) को दिया गया था किन्तु उन्होंने इस काम में रुचि नहीं ली। ऐसे में आम लोगों के हित में उनसे यह दायित्व वापस लेने का विभाग निर्णय लिया है।चकबंदी निदेशक ने इस संबंध में सभी डीएम को पत्र भेजा है। दरअसल 9.65 लाख ऐसी गड़बड़ियां है जिन्हें जमाबंदी पंजी 2 (कागजी दस्तावेज) से ऑनलाइन तो किया गया पर उस दौरान किसी का खाता, किसी का खेसरा तो किसी का नाम ही गलत कर दिया गया। उस कारण विभाग ने इन्हें लॉक कर दिया था जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही थी। डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ताओं) ने विभाग को बताया कि रैयती भूमि की जमाबंदी सृजन का साक्ष्य अंचल कार्यालयों ने उपलब्ध नहीं कराए। इसलिए उन्हें निर्णय लेने में परेशानी हो रही थी।
सीओ को अधिकार देने से गड़बड़ी ठीक होगी
रैयती भूमि होने पर सीओ अनलॉक करेंगे
लॉक जमाबंदी में सरकारी भूमि से अलग अर्थात रैयती स्वरूप की भूमि पाए जाने की स्थिति में उसे सीओ अनलॉक करेंगे। अनलॉक करके उसकी सूची मौजावार पोर्टल पर डालेंगे। सरकारी भूमि होने पर सीओ द्वारा अभिलेख खोलकर उसकी जांच की जाएगी। संबंधित पक्ष को नोटिस निर्गत कर और उसे उचित अवसर प्रदान करते हुए रद्द किया जाएगा।
राजस्व कर्मियों को दी जा रही जानकारी
जमीन दस्तावेजों की गड़बड़ी दूर करने के लिए ही राजस्व कर्मियों को राजस्व विधि से संबंधित पुस्तकें दी गई हैं। राजस्व कर्मचारियों को दाखिल-खारिज अधिनियम, जमाबंदी से संबंधित वैधानिक कार्रवाई, दाखिल-खारिज एवं एलपीसी के ऑनलाइन निर्गमन, बीटी एक्ट के साथ-साथ भू-बन्दोबस्ती एवं भू-अर्जन से संबंधित उनके दायित्वों के बारे में बताया जा रहा है। बिहार में तकरीबन साढ़े 4 हजार राजस्व कर्मचारी हैं।
गलत तरीके से पंजी-2 में जमाबंदी कायम की गई
छूटी हुई जमाबंदियों को गलत तरीके से पंजी-2 में जमाबंदी कायम कर ऑनलाइन कर दिया गया था डिजिटाइजेशन के क्रम में कुछ जमाबंदियों में रैयतों के नाम, खाता, खेसरा, रकबा एवं लगान से संबंधित विवरणों में अशुद्धियां रह गई थीं। साथ ही अनेक रैयतों की जमाबंदी ऑनलाइन नहीं की जा सकी थी। बाद में शिकायत मिली की अंचलों में ऐसी छूटी हुई जमाबंदियों को गलत तरीके से पंजी-2 में जमाबंदी कायम कर दिया गया। 9.65 लाख जमाबंदियों को छूटा हुआ बताकर ऑनलाइन कर दिया गया था।



