तिलौथू रोहतास/ Etv News 24
डॉ. उदय नारायण मिश्रा ऐसे ही महान चिकित्सक एवं समाजसेवी हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन अपनी जन्मभूमि और क्षेत्र के लोगों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। चिकित्सा सेवा के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका संपूर्ण जीवन समाज के लिए एक प्रेरणा बन जाता है। वर्ष 1942 में बिहार के रोहतास जिले के तिलौथू में जन्मे डॉ. मिश्रा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एक छोटे से ग्रामीण विद्यालय से प्राप्त की तथा मैट्रिक तक की पढ़ाई तिलौथू हाई स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने आरा जैन कॉलेज से बी.एससी. की शिक्षा ग्रहण की और वर्ष 1965 में पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की।वर्ष 1967 में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर सेंट्रल हेल्थ सर्विस में अपनी सेवाएँ प्रारंभ कीं। आगे चलकर उन्होंने डी.सी.एच. (बाल रोग विशेषज्ञ) की उपाधि प्राप्त की और वर्ष 1972 में पीपीसीएल, अमझोर में चीफ मेडिकल ऑफिसर (Chief Medical Officer) के पद पर नियुक्त हुए।लगभग 28 वर्षों (1972–2000) तक उन्होंने अमझोर जैसे सुदूरवर्ती, पहाड़ी एवं वन क्षेत्र में अपनी चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कीं। उस समय वहाँ स्वास्थ्य सुविधाएँ अत्यंत सीमित थीं, लेकिन डॉ. मिश्रा ने हजारों-लाखों गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों का उपचार कर उन्हें नया जीवन दिया। विशेष रूप से बच्चों और ग्रामीणों के बीच उनकी सेवाएँ आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद की जाती हैं।वर्ष 2000 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम का मार्ग नहीं चुना। उन्होंने जगजीवन सेनिटोरियम में निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला और वर्षों तक टीबी (क्षय रोग) से पीड़ित मरीजों का निःशुल्क उपचार एवं मार्गदर्शन करते रहे। आज भी वे अत्यंत कम शुल्क पर तिलौथू में मरीजों की सेवा कर रहे हैं। चिकित्सा सेवा के साथ-साथ डॉ. मिश्रा पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक-सामाजिक कार्यों में भी सदैव अग्रणी रहे हैं। अमझोर क्षेत्र में उन्होंने हजारों पौधों का रोपण कर हरित वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने पैतृक गांव में उन्होंने कई जर्जर एवं टूटे हुए मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया, उनका सौंदर्यीकरण करवाया तथा विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियों की स्थापना कर धार्मिक आस्था को नई ऊर्जा प्रदान की।आज लगभग 85 वर्ष की आयु में भी उनका उत्साह, सेवा-भाव और समाज के प्रति समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। वे निरंतर लोगों के स्वास्थ्य, विशेषकर बच्चों की चिकित्सा सेवा में लगे हुए हैं। उनके सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, विनम्र व्यवहार और मानवीय संवेदनाओं ने उन्हें क्षेत्र के लोगों के बीच अत्यंत सम्मानित स्थान दिलाया है।डॉ. उदय नारायण मिश्रा का जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि सच्ची सफलता केवल पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए निःस्वार्थ कार्यों से प्राप्त होती है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा, समर्पण, करुणा और मानवता का एक उज्ज्वल उदाहरण है।



