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समा चकेवा खेलती सहेलियां बहनें अपने भाईयों की दीर्धायु की कामना करती है।

बादल हुसैन
जयनगर आधुनिकता की इस दौड में कई त्यौहार पीछे छुटे जा रहे है।लेकिन मिथिलांचल की महिलाएं आज भी पुरानी परंपरा को जीवंत रखते हुए प्रसिद्ध लोक उत्सव सामा चकेवा मनातीं आ रही है।भाई बहन के बीच अटुट स्नेह के प्रतीक के रुप में मनाए जाने वाले इस लोक पर्व को लेकर छठ पर्व के सुबह उदयगामी सूर्य को अधर्य देने के बाद शाम से ही प्रखंड क्षेत्र की गलियां चुगला करे चुगली बिलैया करे म्याउ चुगला के टीक हम नोच नोच खाउ जैसै ,,,,,,,, सामा चकेवा की गीतों से मिथिलांचल जूंजने लगी है।आठ दिनों तक चलने वाले इस लोक उत्सव का समापन 29 नवंबर को यानी कार्तिक पूर्निमा की रात में होगा। इस दौरान बहने अपने भाइयों को धान की नई फसल की चुडा़ एवं दही खिलाकर सामा चकेवा के मूर्तियों को डोली पर बैठा कर विदाई गीत के बीच पोखरे व तालाबों में विसर्जित कर देते है।बरही गांव की प्रिति कुमारी,अनुपम कुमारी,ज्योति कुमारी,मधु कुमारी,रिना कुमारी,पूनम कुमारी,ने बताया की हम लोग शाम के सभी घर के काम समाप्त होने के बाद शाम होने पर अपनी सगी सहेलियों की टोली में मिथिली लोगगीत गाती हुई अपने अपने घरों से बाहर निकलती है।जो दृष्ट देखने लाईक होती है।हाथों में बांस की बनी हुई टोकरियां रहती है ।टोकरियों में मिट्टी से बनी हुई सामा चकेवा की मूर्तियां ,पक्षियों की मूर्तियां व चुगिला की मूर्तियां रखी जाती है। जो सामा खेलने के दौरान चुगला चुगली को जलाने का उद्देश सामाजिक बुराइयों का नाश करना है।ग्रामीण महिलाएं व युवतियां विभिन्न जगहों पर अपने अपने तरीके से भी कहानियां सुनाती व गढ़ती है।परन्तु सभी का भाव एक ही होता है।कहते है कि सामा कृष्ण की पुत्री थी।सामा के पिता कृष्ण ने गुस्से में आकर उन्हें मनुष्य से पक्षी बन जाने की सजा दे दी।लेकिन अपने भाई चकेवा के प्रेम और त्याग के कारण वह पुनः पक्षी से मनुष्य के रुप में आ गई ।उस वक्त से भाई बहन के इस पवित्र प्रेम पावन कहानी सामा चकेवा के रुप में संपूर्ण मिथिलांचल में प्रसिद्ध है। मिथिलांचल में भाई बहन का जो सम्बन्ध है उसे दर्शाता है।कार्तिक पूर्णिमा को बहने अपने भाइयों को पेडा़, बतासा,व मूढी़ आदि से भाई की झोली भरती है।ग्रामीण सुनिता देवी का बताना है कि बहने भाई की झोली भरकर उनके यहां हमेशा धन धान्य भरे रहने की और भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनके लंबी उम्र का कामना करती है। वही भाई छोटी व बडी़ बहनों को बदले में कोई उपहार देकर उन्के यह विश्वास दिलाता है कि उनकी खुशी व दुख में वे हमेंशा उनके साथ रहेंगे।

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