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दिनारा के सुशील बने सबसे कम उम्र में सिविल जज

सासाराम/बिहार
कहते हैं विलक्षण प्रतिभा, लगन व मेहनत से कोई काम की जाए तो सफलता आपके कदम चूमेगी। इसे चरितार्थ किया है 26 वर्षीय सुशील ने। बिहार लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित 30 वीं बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा का शुक्रवार को रिजल्ट प्रकाशित हुआ। जिसमें प्रखंड के कुंड गांव के प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह व उषा देवी के पुत्र सुशील कुमार सिंह ने पहले ही प्रयास में सिविल जज बनकर जिले का नाम रौशन किया है। सूबे में सुशील को 124 वां स्थान मिला है। सफल होने की सूचना मिलते ही क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके घर बधाई देने के लिए तांता लगा हुआ है। दो बहनें व एक भाई में सबसे बड़े सुशील कुमार सिंह प्रखंड के कुंड गांव के त्रिलोकी सिंह व श्रीपत सिंह के पोता हैं। पिता प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह झारखंड के गढ़वा में गोविंद इंटरमीडिएट कॉलेज में नियुक्त हैं। माता उषा देवी गृहिणी हैं। सुशील की प्रारंभिक शिक्षा राजगीर में हुई। जहां से मैट्रिक करने के बाद डीएवी बोकारो से 2011 में इंटर किया। स्कूल ऑफ लॉ भुवनेश्वर उड़ीसा से कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भोपाल से 2018 में एलएलएम किया। इसके बाद उसी वर्ष कानून नेट क्वालीफाई किया। बिहार में न्यायिक सेवा की परीक्षा का आवेदन अगस्त 2018 में दिया। सुशील ने बताया कि इंटर के बाद ही जज बनने का सपना देखा था। परीक्षा की तैयारी के लिए सेल्फ स्टडी सबसे अच्छा साधन है। समीर के जज बनने पर दादा त्रिलोकी सिंह, मामा रवीन्द्र कुमार सिंह, श्रीपत सिंह, रामाकांत सिंह लादा, शिवाकांत सिंह, प्रदीप पांडेय, कमलकांत सिंह, अनिल सिंह, बबुआ जी, राधेश्याम सिंह, हरिकांत सिंह, भूटान सिंह, रवि भेलारी, राम बचन पांडेय, मुखिया संघ अध्यक्ष रंजय सिंह, सरोज कुमार गुप्ता आदि ने प्रसन्नता जतायी है।

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